जगद्गुरू शंकराचार्य का दावा – आधुनिक विज्ञान नहीं, बल्कि वेद है कंप्यूटर का आधार

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कंप्यूटर को लेकर एक बार फिर से नई बात सामने आई है. इस बार किसी वैज्ञानिक ने कंप्यूटर को लेकर कोई बात नहीं की है, बल्कि पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने दावा किया है कि कंप्यूटर, बायनरी सिस्टम और आसान गणितिय गणना के तरीकों की उत्पत्ति वेद में हुई है. इन सबका आधार वेद ही है. लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय हॉल में एक कार्यक्रम में वेद पर छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक नवाचार और प्रद्यौगिकी वैदिक विज्ञान के इस्तेमाल से अनुसंधान के ज़रिेये और भी सफल हो सकता है.

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शंकराचार्य ने कहा कि अथर्ववेद को जादुई फॉर्मूले के वेद के रूप में जाना जाता है, जिसने गणित को आसान बना दिया. जिस बायनरी सिस्टम का इस्तेमाल आज आधुनिक कंप्यूटर्स और कंप्यूटर आधारित उपकरणों में किया जाता है, उसकी उत्पत्ति भी अथर्ववेद में ही हुई है. साथ ही शून्य की अवधारणा भी वेद में ही है. जिस भी चीज़ की गणना में घंटों लग जाते हैं, वैदिक गणित से उसकी गणना बस कुछ ही मिनटों में संभव है.


Source: tahlkanews

कार्यकर्म में शंकराचार्य ने दावा किया कि वैदिक विज्ञान, भौतिकी, गणित, राजनीति या फिर किसी भी विज्ञान के बारे में सही अवधारणा देता है. उन्होंने कहा कि वेद के अनुसार, पॉलिटिक्स का मतलब राजनीति नहीं है. पॉलिटिक्स का अर्थ राज्य धर्म होता है, जो जिम्मेदारी, सुशासन, अच्छे माहौल, अच्छे स्वास्थ्य, कल्याण और न्याय को परिभाषित करता है. आधुनिक समय में अभी भी विज्ञान के पास बहुत सारे सवालों के जवाब नहीं हैं, लेकिन वैदिक विज्ञान के पास हर सवाल के जवाब मौजूद है. शायद इसीलिए वैदिक विज्ञान को आज कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से लेकर ऑक्सफॉर्ड विश्वविद्यालय तक में मान्यता दी गई है.


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शंकराचार्य के मुताबिक, वर्तमान समय की शिक्षा प्रणाली से राष्ट्र निर्माण विषय खोता जा रहा है. आज की शिक्षा प्रणाली मानव कल्याण और ज्ञान के प्रसार के बजाय पूंजी उगाही पर ज़्यादा केंद्रित हो गई है. धार्मिक और आध्यात्मिक लोगों को अकसर संकीर्ण मानसिकता की विचारधारा वाले लोगों के रूप में माना जाता है. आज ज़रूरत है कि लोग ‘धर्म’ का असल मतलब समझें. धर्म और कर्म किसी व्यक्ति के लिए समाज की उपयोगिता हैं. इंसान को चाहिए की अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करे, जिसके लिए उसका जन्म हुआ है.


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गौरतलब है कि स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, आदि शंकराचार्य द्वारा 8वीं सदी में स्थापित चार मठों में एक ओड़िसा के गोवर्धन मठ के पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य हैं.

इस कार्यक्रम का आयोजन लखनऊ मैनेजमेंट एसोसिएशन द्वारा किया गया था, जिसमें शंकराचार्य ने वेद पर अपना संबोधन दिया. साथ ही उन्होंने स्टूडेंट्स के साथ विज्ञान, इतिहास और उनके करियर के उद्देश्यों के ऊपर भी चर्चा की.

Source: timesofindia

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