40 रुपये हैं टमाटर के दाम, मीडिया 80-100 रुपये बताकर फैला रहा सनसनी

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नई दिल्ली: यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि हमारे देश के ज्यादातर मीडिया गलत और सनसनीखेज ख़बरें दिखाते है। आप खुद देख लीजिये, अभी 15-20 दिन पहले टमाटर के दाम 10-15 रुपये थे। उस वक्त सभी मीडिया चुप्पी साधे बैठे थे, किसी ने भी टमाटर के सस्ते होने का श्रेय मोदी सरकार को नहीं दिया, सभी लोगों ने छककर टमाटर खाए, अचानक बारिश होने से जैसे ही टमाटर की आवक कम हुई और टमाटर 10-20 रुपये के बजाय 40 रुपये में हो गया सभी मीडिया जाग गए, सभी ने हाहाकार मचा दिया।

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 मोदी-tomato

हाहाकार मचाना तो ठीक है लेकिन इन्होने तो 40 रुपये में मिलने वाले टमाटर को 80 से 100 रुँपये में पहुंचा दिया। ये पता नहीं किस दुकान से टमाटर खरीदते हैं, कहीं ये अमेरिका में तो टमाटर खरीदने नहीं जा रहे हैं। दिल्ली और एनसीआर की सभी मंडियों में टमाटर 40 रुपये में मिल रहा है लेकिन मीडिया इसे 80-100 रुपये में बताकर सनसनी फैला रहा है।

एक चीज और देखने वाली है, दो साल तक सूखा पड़ने की वजह से दालें मंहगी हैं लेकिन मीडिया देश को यह बात कभी नहीं बताता है, मीडिया कभी नहीं बताता कि जब चीजों की पैदावार कम होती है तो यह मंहगी हो जाती हैं लेकिन जब चीजों की पैदावार अधिक हो जाती है तो यह सस्ती बिकती हैं, उदाहरण के लिए देखिये, इस वर्ष प्याज का उत्पादन अधिक हुआ है तो प्याज केवल 15 रुपये प्रति किलो बिक रही है, पिछले वर्ष प्याज का उत्पादन कम हुआ था तो पिछले वर्ष इसी महीने में प्याज 40-50 रुपये में थी।

यह भी देखने लायक है कि जब खाने पीने की चीजों के दाम सस्ते होते हैं तो मीडिया इसका श्रेय कभी भी मोदी सरकार को नहीं देता बल्कि सस्ते होने का इल्जाम भी मोदी सरकार पर लगाता है। आपने देखा होगा कि पिछले दिनों मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में प्याज 1-5 रुपये प्रति किलो बिक रहा था तो मीडिया ने उसका इल्जाम भी मोदी सरकार पर लगा रहा था, प्याज के दाम तो अभी भी सस्ते हैं, आलू भी केवल 20 रुपये प्रति किलो है लेकिन मीडिया इसे 40 रुपये में बता रहा है, लगता है कि ये लोग मंडी में सबसे मंहगी दुकान पर जाते हैं या अपने ही आदमी को दूकान पर बैठकर चीजों के दाम अधिक बताते हैं और उसका वीडियो बनाकर सनसनी फैलाते हैं।

आप को यह भी जानकारी होनी चाहिए कि किसान भी फायदा देखता रहता है, अगर किसान टमाटर की खेती करता है तो वह टमाटर के मंहगे होने का इन्तजार करता रहता है, जब टमाटर थोडा मंहगे होते हैं तो उसके साल भर के खर्चे के लिए पैसा मिलता है, अगर टमाटर या अन्य सब्जियां हमेशा सस्ती रहती हैं तो किसानो की आमदनी बंद हो जाती है और उन्हें आत्महत्या जैसे कदम उठाने पड़ते हैं।

उदाहरण के लिए आप देखिये, प्याज की पैदावार अधिक हो गयी है तो किसान रो रहे हैं, उनकी प्याज खरीदने के लिए कोई आगे ही नहीं आ रहा है उसके बावजूद भी हमें दिल्ली या अन्य शहरों में प्याज 10-15 रुपये में मिल रही है। दूसरी तरफ यह देखिये कि पूरे साल टमाटर सस्ते रहते हैं, गर्मी में टमाटर थोड़े मंहगे हो जाते हैं क्योंकि जल्दी पकने की वजह से आधे से अधिक टमाटर रास्ते में ही खराब हो जाते हैं, ऐसे में टमाटर थोडा मंहगे बिकने से किसानो का भी फायदा होता है, अगर वे 1-2 रुपये में टमाटर बेचेंगे तो उनकी क्या आमदनी होगी और वे अपने बच्चों को क्या खिलाएंगे। अगर हमारे देश के किसान एक दो महीने के लिए टमाटर 20-30 रुपये में बेचकर थोडा मुनाफ़ा कमा लेंगे तो इससे देश पर कौन सा पहाड़ टूट पड़ेगा। जिसके बस में टमाटर खरीदना नहीं है वो थोडा कम खाए, दो की जगह सब्जियों में केवल एक ही टमाटर डाले।

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