गौरक्षा के लिए भगवान श्री राम ने मारे थे दो राक्षस

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सनातन हिन्दू धर्म को नीचा दिखाने के लिए बोला जाता है कि वेदों में गौ-मांस खाने की बात लिखी गयी है. यहाँ तक बोला जाता है कि सनातनी हिन्दू यज्ञों में गाय की बलि भी दी जाती थी. यह बात जिस आधार पर बोली जाती है वह अंग्रेज ( MaxMuller ) द्वारा वेदों का अंग्रेजी में अनुवाद है. कोई भी व्यक्ति सिर्फ अंग्रेजों द्वारा वेदों का अनुवाद पढ़ता है और बोल देता है कि वेदों में तो गौ-मासं खाने के प्रमाण हैं.

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किन्तु कोई भी व्यक्ति यह प्रयास नहीं करता है कि वह खुद हमारे संस्कृत के मूल वेद पढ़े और तब बताये कि वहां क्या लिखा हुआ है. आज हम आपको आज से हजारों साल पहले की एक कहानी बताते हैं जहाँ खुद भगवान श्री राम राक्षसों का वध इसलिए करते हैं क्योकि वह ब्राह्मण और गाय की हत्या करने लगे थे-

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गुरु विश्वामित्र अयोध्या आते हैं –

महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ कार्यों में राक्षस विघ्न डाल रहे थे. इन राक्षसों का अंत करवाने के लिए गुरु विश्वामित्र अयोध्या आते हैं और नरेश दशरथ के पास पहुँचते हैं. वहां वह दशरथ जी से कहते हैं कि- महर्षि पुलस्त्य के वंश में एक राक्षस पैदा हुआ है जिसका नाम रावण है. उसी की प्रेरणा से दो बड़े बलवान राक्षस मारीच और सुबाहु यज्ञों में विघ्न डाल रहे हैं. इन राक्षसों के संहार के लिए मुझे तुम्हारे राजकुमार राम और लक्ष्मण दो.

वाल्मीकि रामायण के बाल काण्ड में दर्ज है यह घटना –

राम लक्ष्मण को घनघोर जंगल में ले जाकर विश्वामित्र ने राम से बोला कि हे राम! तुम इस दुष्टा अत्यंत कठोर ह्रदयवाली और दुष्ट पराक्रमवाली ताड़का को मारकर गाय की रक्षा करो और ब्राह्मण का हित साधन करो.

गाय की रक्षा

इसका जवाब श्री राम ने कुछ ऐसा दिया –

हे महर्षि! आपके कथानुसार ताड़का को मारकर मैं गाय की रक्षा और ब्राह्मण का हित साधन करने तथा इस देश के निवासियों को सुखी करने के लिए तैयार हूँ.

उस ताड़का का वध करने के लिए लिए राम-लक्ष्मण दोनों ही विश्वामित्र जी के आश्रम में आ जाते हैं.

अब जब यहाँ राम और लक्ष्मण उपस्थित हैं तो गाय और यज्ञ भी सुरक्षित है, इस बात से सहमत सभी साधू दिल से निकाल देते हैं और यज्ञ प्रारंभ कर देते हैं. यज्ञ पांच दिनों तक लगातार होता है और यज्ञ के छठे दिन राक्षस यहाँ पर हमला कर देते हैं. सेना लेकर ताड़का तो नहीं आती है किन्तु मारीच और सुबाहु जरुर आते हैं. तब भगवान राम और लक्ष्मण, मारीच और सुबाहु के साथ एक भयंकर युद्ध लड़ते हैं और दोनों के साथ-साथ इनकी सेना का भी सर्वनाश कर देते हैं.

तो इस कहानी से सिद्ध होता है कि गाय की रक्षा और ब्राह्मण की रक्षा के लिए भगवान राम ने भी युद्ध लड़े हैं और गाय को राम भी पूजनीय मानते थे.

तो ऐसे में अगर भगवान गाय की रक्षा करते हैं तो क्या उनके भक्त या उनके राज्य में गौ हत्या हो सकती थी?

असल में गाय की हत्या राक्षस करते थे और उसका मांस राक्षस खाते थे. देवता और मनुष्य तो शुरुआत से ही गाय की रक्षा करते आये हैं. यही बात वेदों में कई बार लिखी हुई है.

(इस लेख में लिखी बातों को जांचने के लिए आप डा. सुरेन्द्र सिंह बिष्ट की पुस्तक गोमाता-भारतीय लोकमानस की चिरंतन आस्था को पढ़ सकते हैं. यहाँ सिद्ध किया गया है कि भारतीय लोग कभी गाय का मांस नहीं खाते थे और वेदों में ऐसा कहीं नहीं बोला गया है.)

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