जानिए भारत की 5 ऐसी स्पेशल फोर्सेस के बारे में जिनसे पूरी दुनिया खाती है ख़ौफ

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1. मार्कोस

मरीन कमांडोज़ का छोटा फॉर्म मार्कोस है जो कि इंडियन नेवी का स्पेशल ऑपरेशन यूनिट है. हालांकि वे किसी भी तरह के दुरूह इलाके में ऑपरेशन चलाने में सक्षम हैं, मगर उनका मरीन इनवारनमेंट में स्पेशलाइजेशन है. मार्कोस सन् 1947 से देश की सुरक्षा में लगे हुए हैं. आतंकवाद से लड़ने, जल-थल युद्ध, लोगों को विकट परिस्थितियों से निकालने में इनकी काफ़ी अहम भूमिका रही है. दुश्मनों और आतंकवादियों में इनका बहुत खौफ है, जो इनकी दाढ़ी की वजह से इन्हें दाढ़ीवाला फौज के रूप में जानते हैं. समय-समय पर इन्हें अन्य देशों के साथ स्पेशल ट्रेनिंग भी दी जाती है.

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Source: wikipedia

2. पारा कमांडोज़

पारा कमांडोज़ हमारे देश के बेस्ट स्पेशल फोर्सेस में से एक हैं, जिनकी स्थापना इंडियन आर्मी के यूनिट के बतौर 1965 में हुई थी. वे होस्टेज रेस्क्यू, काउंटर टेररिज्म, पर्सनल रिकवरी में विशेष रूप से पारंगत किए जाते हैं. इनमें से लगभग सभी को इंडियन आर्मी के पैराशूट रीजिम से रिक्रूट किया जाता है, जिसकी वजह से उन्हें हमेशा ऑपरेशन के लिए तैयार रहने के साथ-साथ शारीरिक फिटनेस भी मेंटेन करनी पड़ती है. उनके द्वारा किए गए प्रमुख ऑपरेशन्स में से 1971 और 1999 का पाकिस्तान युद्ध है. साथ ही वे 1984 में एक समय के कुख्यात ऑपरेशन ब्लू स्टार का भी हिस्सा रहे चुके हैं.

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3. घातक फोर्स

घातक अब जैसा कि नाम से ही जाहिर है वे बड़े घातक हैं. ये हमारे पैदल सेना के बेहद खतरनाक 20 लड़ाकों की फौज है. विश्वास मानिए कि ये इतने खतरनाक होते हैं कि वे दुश्मनों के हथियार संग्रह और हवाई हमले जो दुश्मनों के गढ़ में घुस कर उनकी ख़बर लेने के लिए विशेष रूप से कुख्यात हैं.

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4. फोर्स वन

फोर्स वन सबसे हाल में ही बने स्पेशल फोर्स का नाम है. जिसे महाराष्ट्र सरकार ने 2010 मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद बनाया गया है. इनका मुख्य काम मुंबई मेट्रोपॉलिटेन को सुरक्षित रखना है. यह स्पेशल फोर्स दुनिया के सबसे तेज और चपल स्पेशल फोर्सेस में से एक हैं, जिन्हें किसी भी आपदा से लड़ने के लिए सिर्फ़ 15 मिनट की ज़रूरत होती है. है न चौंकाने वाली बात!

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5. कोबरा

यह सी.आर.पी.एफ. का एक विशेष दस्ता है जिसे नक्सल मूवमेंट की समस्या से निपटने के लिए बनाया गया है. The Commando Battalion for Resolute Action(COBRA) की स्थापना 2008 में की गई थी. इस विशेष दस्ते को नक्सलियों से जंगलों में, पहाड़ियों में लड़ने के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है. समय-समय पर उन्हें विशेष ट्रेनिंग भी दी जाती है. इस तस्वीर में उन्हें इजराइल के लड़ाकों के साथ देखा जा सकता है.

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