PM मोदी की ड्रैगन को चपत, चीन के दक्षिणी समुद्र पर भारत-जापान साथ-साथ

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टोक्यो (12 नवंबर):चालबाज चीन भारत को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ता। लिहाजा अब भारत भी चीन को उसी की भाषा में जवाब देने और घेरने में जुटा है। भारत और जापान की बढ़ती नजदीकी से भी अब चीन चिढ़ने लगा है। साउथ चाइना सी के मुद्दे पर भारत ने जापान के रूख का सर्मथन किया है। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी इन दिनों जापान के तीन दिनों के दौरे पर है। इस दौरान उन्होंने साउथ चाइना सी के मुद्दे पर जापान की नीति का सर्मथन किया है।

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इसके अलावा चीन के विरोध के बावजूद पीएम मोदी ने जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे के साथ इरान में चाबहार बंदरगाह पर एक साथ काम करने की संभावना पर चर्चा की। इस बंदरगाह के जरिए भारत का पाकिस्तान से हटकर अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया तक आना-जाना आसान और सुविधाजनक हो जाएगा। यह बंदरगाह पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बनाए गए चीन के ग्वादर बंदरगाह के समकक्ष होगा।


दरअसल चीन साउथ चाइना सी में अपना दावा पेश कर रहा है और यहां आक्रमक नीति अपना रहा है। जबकि जापान समेत साउथ चाइन सी से जुड़े तमाम देश चीन के इस रवैये का विरोध कर रहा है। इंटरनैशनल ट्राइब्यूनल ने अपने फैसले में दक्षिण चीन सागर पर चीन के दावे को खारिज कर दिया है, फिर भी चीन इस मुद्दे पर अपने पुराने रूख पर कायम है।

भारत के मुताबिक समुद्र में आवागमन को लेकर संयुक्त राष्ट्र के नियमों का सभी देशों को पालन करना चाहिए। भारत और जापान साउथ चाइना सी के तनाव से जुड़े सभी देशों से आग्रह किया है कि वह आपसी समझ बूझ और बातचीत से इस समस्या का समाधान करे। साथ ही किसी भी पक्ष को बल इस्तेमाल करने की धमकी भी नहीं देनी चाहिए और तनाव बढ़ाने वाला कोई कदम नहीं उठाना चाहिए। आपको बता दें कि पीएम मोदी के जापान दौरा शुरू होते ही चीन सरकार के प्रमुख पत्र में भारत और जापान को दक्षिण चीन सागर से अलग रहने की नसीहत दी थी।

जानकार साउथ चाइन सी के मसले पर भारत के इस रुख को NSG और आतंकवाद के मुद्दे पर चीन के अड़ंगे के जवाब के तौर पर देख रहे हैं। आपको बता दें कि चीन ने बीते कुछ समय से भारत के कई मामलों में अड़ंगा लगाया है। न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में भारत की एंट्री चीन के विरोध के चलते ही नहीं हो पाई थी। इसके अलावा जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर को आतंकी घोषित करने के भारतीय प्रस्ताव का भी चीन ने संयुक्त राष्ट्र में विरोध किया। और अब भारत के इस कूटनीति को चीन के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।

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