पीएम ने वो कर दिखाया जो UPA 10 साल में नहीं कर सकी !

4908

New Delhi, May 23 : PM Modi  इन दिनों ईरान यात्रा पर हैं। इस से पहले भी वो कई देशों की यात्रा कर चुके हैं। जिनके दौरान कई अहम समझौते देखने को मिले थे। लेकिन ईरान दौरा खास तौर पर भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। इस दौरे में Modi  सरकार ने वो कर दिखाया जो कांग्रेस की सरकारें नहीं कर पाईं। राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए PM Modi  ईरान के साथ Chabahar Port की डील पर साइन करेंगे।

आकर्षक ऑफर के लिए यहाँ क्लिक करें

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि Chabahar Port डील को विकास के इंजन के रूप में देखा जाना चाहिए। पहले फेस के लिए साइन होने के बाद भारत-ईरान संबंधों की नई शुरूआत होगी। आपको बता दें कि इस समझौते की शुरूआत बाजपेयी सरकार के वक्त हुई थी। लेकिन बीच में यूपीए सरकार की देरी के कारण इस पर अब तक दस्तखत नहीं हो पाए थे।

modi-sarkar

क्या है पूरा मामला ?

आपको बताते हैं कि Chabahar Port का पूरा मामला क्या है। जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट और कांडला पोर्ट के संयुक्त उपक्रम इंडियन पोर्ट ग्लोबल प्राइवेट और ईरान की आर्य बांदर कंपनी के बीच कॉन्ट्रैक्ट साइन किया जाएगा। इसके तहत चाबहार पोर्ट के पहले फेस के लिए दो टर्मिनल और पांच मल्टी कार्गो बर्थ बनाए जाएंगे। पहले फेस के लिए भारत की तरफ से लगभग 200 मिलियन डॉलर का इनवेस्टमेंट किया जाएगा।

आपको बता दें कि भारत और ईरान के बीच 2015 में एक MoU साइन किया गया था। जिसके बाद अब ईरान दौरे पर PM Modi , Chabahar Port के पहले फेस के लिए साइन करेंगे। भारत के लिहाज से चाबहार पोर्ट बेहद महत्वपूर्ण है। चाबहार साउथ-ईस्ट ईरान में है। यहां पोर्ट बनने के मतलब है कि भारत को पाकिस्तानी रास्ते से होकर व्यापार नहीं करना होगा। अफगानिस्तान के साथ भारत ने महत्वपूर्ण सुरक्षा समझौता कर रखा है।

Chabahar Port से जो रूट बनेगा वो अफगानिस्तान के जरंज तक आएगा। जो लगभग 883 किलोमीटर है।  जरंज-देलरम रोड को भारत ने 2009 में बनाया था इसके जरिए अफगानिस्तान के गारलैंड हाईवे तक भारत की पहुंच हो जाएगी। ये अफगानिस्तान के चार अहम शहरों हेरत, कांधार, काबुल और मजार-ए-शरीफ को सड़क मार्ग से जोड़ेगा। चाबहार पोर्ट के जरिए भारत कच्चा तेल और यूरिया ला सकता है इस से परिवहन का खर्च बचेगा।

भारत Chabahar Port के दो बर्थ को 10 साल के लिए लीज पर लेना चाहता है। ये पोर्ट एक विशेष काम के लिए तैयार किया जाएगा। जिसमें मल्टी कार्गो टर्मिनल के लिए लगभग 85.21 मिलियन डॉलर का खर्च आएगा। भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच त्रिपक्षीय समझौता होगा। इस पोर्ट के जरिए भारत की कंपनियां फरजाद बी गैस को डेवलप करने के बारे में विचार कर रही हैं। फरजाद बी गैस फील्ड को ONGC विदेश ने खोजा था। कुल मिलाकर चाबहार पोर्ट के जरिए भारत की पहुंच अफगानिस्तान से लेकर मध्य एशिया और नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर तक हो जाएगी।

Chabahar Port डील को लेकर विशेषज्ञ Modi  सरकार की जमकर तारीफ कर रहे हैं। जानकारों के मुताबिक इस डील से Modi  सरकार ने राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचय दिया है जो पूर्व की सरकारें नहीं दिखा पाईं। ये रणनीतिक तौर पर Modi  सरकार की जीत है कि ईरान के साथ संबंधों को नए स्तर पर ले गए। यूपीए सरकार ने दिल्ली और तेहरान के संबंधों को गंभीरता से नहीं लिया था। चाबहार पोर्ट को Modi  सरकार का मास्टर स्ट्रोक कहा जा रहा है।

यूपीए सरकार ने अमेरिका के कहने पर Chabahar Port में दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। अमेरिका ने भारत समेत कुछ देशों से कहा था कि वो ईरान के साथ व्यापार करने में जल्दबाजी ना करें। अब चाबहार पोर्ट पर साइन करने से दुनिया में भारत की साख बढ़ेगी। सड़क मार्ग से भारत की पहुंच अफगानिस्तान, ईरान औऱ यूरेशिया तक हो जाएगी। इसके जरिए अब भारत ने चीन और पाकिस्तान के इकोनॉमिक कॉरिडोर का मुंहतोड़ जवाब दिया है।

loading...