मन की बात Live: नोटबंदी पर क्या कह रहे हैं मोदी पढ़िए

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नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद पहली बार प्रधानमंत्री ‘मन की बात’ कर रहे हैं। यह 26वीं बार है जब पीएम देश से ‘मन की बात’ कर रहे हैं।  इससे पहले 30 अक्टूबर को पीएम ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा था कि इस बार की दीपावली सेना के जवानों के लिए मनाएं। देश भर में सेना के जवानों के लिए दिए जलें। उन्होंने सरहद पर तैनात सेना के जवानों की सराहना करते हुए कहा था कि हमारी सेना हर कार्रवाई का मुहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। क्या-क्या कह रहे हैं मोदी पढ़ें-

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  • मैंने ‘मन की बात’ के लिए लोगों के सुझाव मांगे, एकतरफ़ा ही सबके सुझाव आए, सब कहते थे कि 500,1000 रुपये पर विस्तार से बात करें। जिस समय मैंने ये निर्णय किया था तब भी मैंने सबके सामने कहा था कि ये निर्णय सामान्य नहीं है, कठिनाइयों से भरा हुआ है। मुझे ये भी अंदाज़ था कि हमारे सामान्य जीवन में अनेक प्रकार की नई–नई कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। निर्णय इतना बड़ा है इसके प्रभाव से बाहर निकलने में 50 दिन तो लग जाएंगे, तब जाकर सामान्य अवस्था की ओर हम बढ़ पाएंगे।
  • आपकी कठिनाइयों को मैं समझता हूं, भ्रमित करने के प्रयास चल रहे हैं फिर भी देशहित की इस बात को आपने स्वीकार किया है। कभी-कभी मन को विचलित करने वाली घटनाएं सामने आते हुए भी, आपने सच्चाई के इस मार्ग को भली-भांति समझा है। 500,1000 रुपये और इतना बड़ा देश इतनी करेंसियों की भरमार और ये निर्णय, पूरा विश्व बहुत बारीक़ी से देख रहा है। पूरा विश्व देख रहा है कि सवा-सौ करोड़ देशवासी कठिनाइयां झेल करके भी सफलता प्राप्त करेंगे क्या। विश्व के मन में प्रश्नचिन्ह हो सकता है, लेकिन भारत को विश्वास है कि देशवासी संकल्प पूर्ण करके ही रहेंगे। हमारा देश सोने की तरह तप करके, निखर करके निकलेगा और उसका कारण इस देश का नागरिक है, उसका कारण आप हैं।
  • केंद्र, राज्य, स्थानीय स्वराज संस्थाओं की इकाइयां, बैंक कर्मचारी, पोस्ट ऑफिस-दिन-रात इस काम में जुटे हुए हैं। तनाव के बीच, ये सभी लोग बहुत ही शांतचित्त रूप से, इसे देश-सेवा का एक यज्ञ मान करके कार्यरत हैं। सुबह शुरू करते हैं, रात कब होगी, पता तक नहीं रहता है और उसी का कारण है कि भारत इसमें सफल होगा। कठिनाइयों के बीच बैंक,पोस्ट ऑफिस के लोग काम कर रहे हैं और जब मानवता के मुद्दे की बात आ जाए तो वो दो क़दम आगे हैं। इस महायज्ञ के अंदर परिश्रम करने वाले, पुरुषार्थ करने वाले इन सभी साथियों का भी मैं ह्रदय से धन्यवाद करता हूं। जन-धन योजना को बैंक कर्मचारियों ने जिस प्रकार से अपने कंधे पर उठाया था उनके सामर्थ्य का परिचय हुआ।
  • लेकिन बुराइयां इतनी फैली हुई हैं कि आज भी कुछ लोगों की बुराइयों की आदत जाती नहीं है। बेनामी संपत्ति का इतना कठोर क़ानून बना है, कितनी कठिनाई आएगी और सरकार नहीं चाहती है कि देशवासियों को कोई कठिनाई आए। मैं चुनाव में चाय पर चर्चा करता था लेकिन मुझे पता नहीं कि चाय पर चर्चा में, शादी भी होती है। सूरत में इस तरह विवाह वालों को बहुत बधाई और आशीर्वाद। देश को तो लाभ आने वाले दिनों में मिलेगा, लेकिन कुछ लोगों को तो तत्काल लाभ मिल गया है। म्युनिसपालिटी में इस साल ज़बरदस्त टैक्स जमा हुआ है जो गरीबों के काम आएगा।
  • -हमारा देश 70 साल से कालेधन से जूझ रहा है। लोगों को गुमराह करने के प्रयास हो रहे हैं लेकिन ज्यादा से ज्यादा लोग हमें समर्थन दे रहे हैं।
  • -कुछ लोग अपना कालाधन सफेद करने में जुटे हैं। इसके लिए वो लोग गरीबों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे लोगों से कहना चाहता हूं कि सुधरना या न सुधरना आपकी मर्जी है, लेकिन इसके लिए गरीबों का इस्तेमाल ना करें। गरीबों की जिंदगी से मत खेलिए, रिकॉर्ड पर गरीब का नाम आ जाए और मेरा प्यारा गरीब आपके कारण फंस जाए।
  • हर वर्ष की तरह इस बार दिवाली पर मैं जवानों के साथ दिवाली मनाने के लिए चीन की सीमा पर, सरहद पर गया था। देशवासियों ने जिस अनूठे अंदाज़ में यह दिवाली जवानों को समर्पित की इसका असर वहां हर जवानों के चेहरे पर अभिव्यक्त होता था। देशवासियों ने जो शुभकामनाएं-संदेश भेजे, अपनी ख़ुशियों में देश के सुरक्षा बलों को शामिल किया,उसका एक अद्भुत रिस्पांस था। देश के सुरक्षा बलों के प्रति आपका जो भाव-विश्व है, उसकी एक कॉफीचेबल बुक बनाई जा रही है। कुछ समय पहले मुझे जम्मू-कश्मीर के प्रधान मिलने आए थे। इतने प्यार से, इतने खुलेपन से, गांव के इन प्रधानों ने बातें कीं, कश्मीर में जो स्कूलें जलाए गए थे, उसकी चर्चा भी हुई और जितना दुःख हम देशवासियों को होता है, इन प्रधानों को भी इतनी ही पीड़ा थी। आज मुझे खुशी हो रही है कि कश्मीर घाटी से आए हुए इन सभी प्रधानों ने गांव में जाकर के सब दूर लोगों को जागृत किया। कुछ दिन पहले जब बोर्ड परीक्षा  हुई तो क़रीब 95% कश्मीर के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। परीक्षाओं में बड़ी तादाद में छात्रों का सम्मिलित होना इशारा करता है कि जम्मू कश्मीर के बच्चे विकास की ऊंचाइयों को पाने के लिए कृतसंकल्प हैं।

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