पीएम मोदी का “मास्टर प्लान” चीन को चैन से सोने नहीं देगा !

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नई दिल्ली: चीन की चालाकी और चाल को नेस्ताबूत करने के लिए भारत सरकार एक रोडमैप तैयार कर सकती है। इस रोडमैप को तैयार करने के लिए भारत का टारगेट होगा पड़ोसी मुल्क नेपाल जिससे भारत और नेपाल के बीच आई रिश्तों में खटास को पाटने की तैयारी हो रही है। पीएम मोदी का ये प्लान नेपाल में चीन के बढ़ते वर्चस्व को चुनौती देने के लिए तैयार हो रहा है। माना जा रहा है कि ये कदम बेहद अहम साबित हो सकता है। भारत और नेपाल के बीच रिश्तों में आई खटास का फायदा चीन लगातार उठा रहा है और वहां अपने मनमाफिक कोराबार बढ़ाने की तैयारी कर रहा है, ये ही वो वजह है जो भारत के लिए परेशानी का सबब है। हो सकता है कि अब ये तस्वीर बदल जाएगी और चीन का ‘प्लान’ नेपाल जल्द ही नेस्तनाबूत हो सकता है।

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दरअसल नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड 3 दिन के भारत दौरे पर आने वाले हैं। ये एक अच्छी खबर है कि पद संभालने के बाद प्रचंड ने पहली विदेश यात्रा के लिए चीन की जगह भारत को चुना है। ये भी कहा जा रहा है कि प्रचंड का अंदाज भी पहले के मुकाबले नरम भी है। प्रचंड को भारत आने का न्यौता पीएम मोदी ने ही दिया था।  प्रचंड 15 से 18 सितंबर तक भारत के दौरे पर रहेंगे। नेपाल के पीएम को दौरे के दौरान अच्छा माहौल तैयार करने के लिए नेपाल के विदेश मंत्री प्रकाश शरण महत भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात भी कर चुके हैं। वहीं नेपाल में भी प्रचंड के दौरे को लेकर बड़ी सरगर्मी है। दौरे के मुद्दों को लेकर नेपाल में सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई थी। इस बीच प्रचंड को भरोसा है कि उनका दौरा दोनों देशों के संबंधों को सामान्य और प्रतिकूल बनाने में मददगार होगा।

नेपाल के पीएम प्रचंड के दौरे को भारत के लिए एक बड़ा चांस भी है। हो सकता है कि मोदी सरकार नेपाल को ईस्ट-वेस्ट रेलवे लाइन डिवेलप करने में मदद करने का ऑफर दे सकती है। कभी माओवादी कमांडर रहे प्रचंड भी भारत के साथ रिश्तों को दोबारा से पटरी पर लाना चाहते हैं। प्रचंड से पहले नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली थे जो चीन के ही समर्थक माने जाते थे। ओली ने चीन के साथ कुछ कारोबारी समझौते किए थे, जिनका मकसद भारत पर नेपाल की आर्थिक निर्भरता कम करना था। ओली सरकार ने ही भारत पर ईंधन और कारोबार संबंधों पर रोक लगाने के आरोप लगाए थे लेकिन प्रचंड का नेपाल की सत्ता में आना और उसके बाद भारत के लिए सकारात्मक रुख अपनाना एक अच्छा संकेत माना जा रहा है।

प्रचंड ने इससे पहले अपने दौरे को लेकर नेपाल में पत्रकारों से बातचीत भी की थी। उन्होंने कहा था कि भारत के साथ नेपाल के रिश्ते कुछ वक्त के लिए खराब हो गए थे और वो इस कड़वाहट को दूर करना चाहते हैं। साथ ही प्रचंड ने ये भी कहा कि नेपाल अभी मुश्किल दौर से गुजर रहा है और इस हालात में भारत उसका मददगार साबित हो सकता है। नेपाल उन देशों में शामिल है, जहां चीन अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में लगा हुआ है। इस बीच नेपाल के पीएम का भारत दौरा ये साबित कर रहा है कि चीन की हरकतों से वो भी आजिज आ चुके हैं। चीन ने नेपाल में कई सड़कें और अस्पताल बनवाए हैं। ड्रैगन की इसी दखलअंदाजी और बढ़ती ताकत को रोकने के लिए प्रचंड का भारत दौरा कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है।

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