तीन तलाक और बहुविवाह ने कीं कई जिंदगियां बर्बाद: महिला आयोग

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राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission for Women) ने मुस्लिम पुरुषों द्वारा अपनाई जा रही तीन तलाक और बहुविवाह प्रथा पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा तीन तलाक असंवैधानिक है और इसने कई महिलाओं का जीवन बर्बाद किया है।

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महिला आयोग ने कहा, ‘आयोग के सामने एकतरफा तलाक की इस प्रथा से पीड़ित महिलाओं के कई मामले सामने आए। तीन तलाक (तलाक-ए-बिदत), निकाह हलाला और बहुविवाह जैसी प्रथाएं असंवैधानिक हैं क्योंकि ये मुस्लिम महिलाओं (या मुस्लिम समाज में ब्याही महिलाओं) के खिलाफ इस्तेमाल होती हैं। यह महिलाओं और उनकी संतानों के लिए नुकसानदेह है।

सुप्रीम कोर्ट में कई महिलाओं द्वारा दायर याचिका के जवाब में आयोग ने शनिवार को अपना हलफनामा दाखिल किया। अपने हलफनामे में आयोग ने लिखा, ‘ये प्रथाएं- तीन तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह- पर सख्ती से पाबंदी लगनी चाहिए। राष्ट्रीय महिला आयोग इस मुद्दे पर केंद्र सरकार का समर्थन करता है।’

केंद्र सरकार ने 7 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में शपथ-पत्र दाखिल कर तीन तलाक और बहुविवाह को असंवैधानिक बताया था। केंद्र सरकार ने कहा था कि इन प्रथाओं महिलाओं की समानता और सम्मान को ठेस पहुंचती हैं। केंद्र सरकार हालांकि तीन तलाक पर अपने रुख को समान नागरिक संहिता से जोड़ने से बच रही है।

सरकारी हलफनामे में कहा गया था कि लैंगिक समानता और महिलाओं के सम्मान के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।

व्यापक संवैधानिक मूल्यों के साथ भी कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

केंद्र ने कहा था कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, मोरक्को, टुनिशिया, टर्की, इंडोनेशिया, मिस्त्र, श्री लंका और ईरान आदि देशों ने भी अपने कानूनों में सुधार किया है और अल्पसंख्यक महिलाओं को समान अधिकार दिए हैं।

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