पति की लंबी उम्र के लिए मुस्लिम महिलाओं ने भी रखा करवा चौथ का व्रत

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देश भर की महिलाएं जब करवा चौथ का व्रत खोलने के लिए चांद के निकलने का इंतज़ार कर रही थीं, तो राजस्थान के चुरू में दो मुस्लिम महिलाएं भी चांद के दीदार के लिए बेसब्र थीं. अंजुमन और दीप्ति दोनों ने ही करवा चौथ का व्रत रखा था.

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अंजुमन की शादी 45 दिन पूर्व जीशान से हुई है और उसने अपने पति की लंबी उम्र के लिए अपनी जेठानी के साथ ये व्रत रखा. उनका परिवार खुले विचारों का है.


अंजुमन और दीप्ति 

टाइम्स ऑफ़ इंडिया से परिवार की बातचीत में पता चला कि वो लोग होली से लेकर दिवाली, मीठी ईद से बकरीद तक हर त्योहार मनाते हैं. अंजुमन और दीप्ति की सास 56 वर्षीय रेहाना रियाज़ को इस बात से बिलकुल हैरानी नहीं हुई जब उनकी बड़ी बहू दीप्ति ने हर हिन्दू त्योहार मनाने की इच्छा ज़ाहिर की. इस तरह से छोटी बहू अंजुमन भी उसकी राह पर चल दी और दोनों ने इस व्रत को साथ में किया.

रेहाना ने TOI से बताया कि ‘ये एक खुले विचारों वाली दुनिया है और हमें हर धर्म और उसकी भावनाओं का आदर करना चाहिए. मेरी बड़ी बहू, जिसकी शादी बेटे हसन से हुई है, शादी से पहले एक हिन्दू लड़की थी और उसने अपने रिवाजों का पालन करने के लिए हमसे कहा. मुझे इसके लिए उसे अनुमति देने में कोई गुरेज़ नहीं हुआ. लेकिन सबसे खास बात तो ये है कि मेरी छोटी बहू अंजुमन ने जब सुबह में दीप्ति को करवा चौथ की तैयारियां करते हुए देखा, तो उसने भी इस व्रत को ज़ाहिर की और मैंने बोला कि करो.’

रेहाना कहती हैं कि ‘सबसे अच्छी बात तो ये है कि वे दोनों मेरे बेटों की लंबी उम्र के लिए व्रत कर रही हैं और इसलिए मुझे उनका आभारी होना चाहिए.’

अंजुमन के पति जॉब के सिलसिले में बाहर हैं, लेकिन फिर भी उन्होंने व्रत किया और चांद देखने के बाद वीडियो कॉल करके पति को देखकर उन्होंने व्रत खोला. अंजुमन ने कहा, ‘दीप्ति भाभी के साथ व्रत की सारी रस्में करने के बाद मैं अपने पति जीशान को वीडियो कॉल करूंगी. ये मेरा पहला करवा चौथ है और मैं इस मुबारक दिन पर व्रत करना जारी रखूंगी. ये सचमुच एक बेहतरीन त्योहार है, जब आप ऊपरवाले से अपने पति के स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करते हैं.’

इस शादी को करने के बाद दीप्ति गौरवान्वित महसूस करती है कि उन्हें अपने सारे धार्मिक रीति-रिवाज अपनाने की अनुमति मिली. वो कहती हैं कि ‘ हम हर त्योहार मनाते हैं. मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे इतने खुले विचारों वाला परिवार मिला.’

शायद यही है अपना असली हिंदुस्तान, जहां सेवइयों वाली ईद भी अपनी है और पटाखों वाली दिवाली भी.

Source: TOI

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