जबतक भारत में धर्म है, दुनिया की कोई ताकत इसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती : मोहन भागवत

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गोरखपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि धर्म ही सबकी रक्षा करता है। जब तक भारत में धर्म और संस्कृति है, दुनिया की कोई ताकत हमारे देश का कुछ नहीं बिगाड़ सकता। और यदि धर्म-संस्कृति का लोप हो गया तो कोई बचा भी नहीं सकता। डॉ.भागवत गीताप्रेस (गोरखपुर) के संस्थापक एवं समाजसेवी हनुमान प्रसाद पोद्दार के 125वीं जयंती वर्ष पर आयोजित एक संगोष्ठि को संबोधित कर रहे थे।

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‘युगदृष्‍टा महामानव भाईजी श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार’ विषय पर आयोजित संगोष्ठि में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए डॉ.भागवत ने कहा कि ईश्वर ने विश्व की सुरक्षा और कल्याण के लिए भारत का चयन किया है। भारत का जबतक उत्थान नहीं होगा विश्व का कल्याण नहीं हो सकता, दुनिया को यूं ही मार पड़ती रहेगी। धर्म से ही भारत का उत्थान होगा।

सरसंघचालक ने कहा कि धर्म और संस्कृति कोई सम्प्रदाय या वस्तु नहीं है, वरन सबको जोड़नेवाला तत्व है। सबको अपना मानना, सबके कल्याण का भाव रखना, यह धर्म के लक्षण हैं। विविध सम्प्रदायों की विभिन्न पूजा पद्धतियों को स्वीकार कर उसका आदर करना चाहिए। हमारे यहां ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया’ का सिद्धांत, सबको जोड़कर सबकी उन्नति का सन्देश देता है। सबके मंगल की कामना करनेवाला यह मंत्र विविधता में एकता का संदेश देता है। धर्म विविधता में एकता की सीख देता है। इस विविधता को हिन्दुओं ने स्वीकार किया। इसलिए इसे हिन्‍दू धर्म या सनातन धर्म कहा जाता है। डॉ.भागवत ने जोर देते हुए कहा कि भारत का उत्‍थान बिना हिन्‍दू धर्म और संस्‍कृति के संभव नहीं है।

सरसंघचालक ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर सीमा पर चल रही गोलाबारी का उल्लेख किया और कहा कि सीमा पर गोलाबारी हो रही है। इसे रोकने के लिए जवाबी कार्रवाई की जाती है। कभी सीमा पर तो कभी-कभी अंदर घुसकर जवाब दिया जाता है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसा बनना होगा कि जो हमसे टकराए वो चूर-चूर हो जाए।

सरसंघचालक ने इस दौरान गौवंश की रक्षा के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्‍होंने कहा कि रोज हजारों गायें कटती हैं, सवाल उठता है कि ये आती कहां से हैं? उन्‍होंने सवाल खड़ा किया कि सब तो चुरायी नहीं जातीं, कुछ तो खरीदी जाती हैं, तब इन्‍हें बेचने वाले कौन हैं? उन्‍होंने कहा, “हम अपने आपको हिन्‍दू कहते हैं, हम खुद को गौमाता का पुत्र बनाते हैं। लेकिन, कुछ रुपयों के लालच में जिसे हम मां कहते हैं उस गौ माता को कसाइयों के हाथों कटने के लिए बेच देते हैं। गोरक्षा, सिर्फ कानूनों से नहीं होगी। समाज जागरूक होगा तभी गौवंश की रक्षा होगी।

सरसंघचालक डॉ.भागवत ने कहा कि हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी) से उनका कभी सम्पर्क नहीं हुआ, लेकिन उनके द्वारा गीता प्रेस के माध्यम से पहुंचाई गई संस्कृति प्रवाह से कोई अछूता नहीं है। हिन्‍दू धर्म की सेवा में गीता प्रेस का बहुत बड़ा योगदान है। बिल्‍कुल सस्‍ती दर पर गीता प्रेस ने भारतीय धर्मग्रंथों को घर-घर पहुंचाया है। इसे एक व्‍यापारी भले ही घाटे का सौदा कहे पर ये एक अभियान ही है। सरसंघचालक ने कहा कि बाबू हनुमान प्रसाद पोद्दार जी ने जिन ग्रंथों को जनमानस के लिए सुलभ बनाया, उसे उन्‍होंने खुद भी अपने जीवन में उतारा। वे अपने आचरण के जरिए धर्म की रक्षा के कीर्तिपूंज थे। सरसंघचालक ने देश और दुनिया के कोने-कोने में धार्मिक पुस्तकों को कम कीमत में पहुंचाने के लिए गीता प्रेस की प्रशंसा की।

संगोष्ठि के दौरान ‘स्कूल ऑफ गुड गर्वनेंस एंड पालिसी एनलिसिस’ नई दिल्ली के महानिदेशक प्रो. हनुमान प्रसाद दीक्षित और गीता प्रेस के सम्पादक राधेश्याम खेमका ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन ओम उपाध्याय ने किया। इस अवसर पर सांसद जगदम्बिका पाल, शिवप्रताप शुक्ल, नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल, मेयर डॉ. सत्या पांडेय, पूर्व मेयर अंजू चौधरी, डॉ. समीर सिंह, उपेन्द्र दत्त शुक्ल, अतुल सर्राफ, रसेन्दु फोगला आदि उपस्थित थे।

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