बुर्के में हसरतों की लिपस्टिक दबाती औरतों की कहानी है, फिल्म Lipstick Under My Burkha

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Lipstick Under My Burkha : पिछले दिनों महिलाओं के सपनों, उनकी उम्मीदों, अधिकारों और हसरतों पर आधारित फ़िल्में दर्शकों ने सराहीं. फिल्म ‘पिंक’ और ‘पार्च्ड’ ने महिला अधिकारों के लिए एक नए दौर की बहस छेड़ दी है. इस बहस से हासिल कुछ हो न हो, लेकिन औरतों ने खुद को इन फिल्मों से जोड़ा है, महसूस किया है. ऐसी ही एक फिल्म लेकर आ रही हैं डायरेक्टर अलंकृता श्रीवास्तव. फिल्म के प्रोड्यूसर हैं प्रकाश झा और फिल्म का नाम है ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ Lipstick Under My Burkha .

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इस फिल्म का ट्रेलर शुक्रवार को रिलीज़ हो गया. एक बार फिर आपको देखने को मिलने वाली है एक ज़बरदस्त वीमेन बेस्ड फिल्म. फिल्म की कहानी पुराने भोपाल में रहने वाली चार महिलाओं के इर्द-गिर्द रची गई है. ये महिलाएं अपने सामाजिक दायरों से हटकर कुछ सोचने और करने का माद्दा रखती हैं.

Lipstick Under My Burkha
Lipstick Under My Burkha
source: youtube

इस फिल्म में रत्ना पाठक, कोंकणा सेन शर्मा, आहना कुमरा, प्लबिता, सुशांत सिंह, विक्रांत मेसी और शशांक अरोड़ा मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे.

ट्रेलर में ये चार महिलाएं अपने-अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश करती नजर आ रही हैं. इसमें दिखाया गया है कि सभी महिलाओं की अपनी चाहत होती है, जिसे वह पूरा करना चाहती हैं. वह समाज के पुराने मानदंडों से अलग सोच रखती हैं और अपनी हसरतों को तवज़्ज़ो देती हैं.

फिल्म का ट्रेलर

ट्रेलर में रत्ना पाठक एक अधेड़ उम्र की महिला के किरदार में नजर आई हैं. वह अपने से कम उम्र के लड़के से प्यार करने लगती हैं. वहीं कोंकणा एक मुस्लिम महिला के रूप में दिखाई दी हैं. फिल्म पूरी तरह से महिलाओं पर केंद्रित है. इस फिल्म में एक आम लड़की की उन इच्छाओं को दिखाने की कोशिश की गई है, जो सामाजिक दबाव के कारण अकसर दम तोड़ देती हैं. इन महिलाओं ने अपने उन्हीं दबे हुए सपनों को पंख देने की कोशिश की है. ट्रेलर देख फिल्म देखने की इच्छा होती है. इसमें सेक्स, रोमांस, ड्रामा और सस्पेंस सभी तरह का फ्लेवर डाला गया है. फिल्म को टोकियो और मुम्बई फिल्म फेस्टिवल में दिखाया जाएगा.

ये फिल्म औरत की इच्छाओं के कई शेड्स को एक्स्प्लोर करती है.

Lipstick Under My Burkha
Lipstick Under My Burkha
source: youtube

फिल्म में रत्ना पाठक उस परदे की बात करती हैं, जिसके पीछे इस समाज में महिलाओं को रखा जाता है. ये परदे महिलाओं की इच्छाओं को छुपा लेते हैं. वो कहती हैं कि ‘परदे बड़े मोटे होते थे, रोज़ी को कोई देख ही नहीं पाता.’

फिल्म को लेकर कोंकणा सेन कहती हैं कि ‘ ऐसी किसी फिल्म में काम करना दुर्लभ होता है, जो औरत की ख़्वाहिशों को पुरसुकून होकर, रंगों में भरकर एक्सप्लोर करती हो.’

फिल्म की डायरेक्टर अलंकृता श्रीवास्तव कहती हैं कि

औरत होने के नाते हमारे कई सीक्रेट सपने होते हैं, जो रोमांटिक फैंटसीज़ से भरे होते हैं. जिन्हें हम फिल्मों, किताबों, गानों और अपने आस-पास की चीज़ों के माध्यम से देख लेते हैं. लेकिन एक बड़ी ही गहरी इच्छा होती है, जो हम में से हर एक में होती ही है, इसी इच्छा को मैंने फिल्म में सामने लाने की कोशिश की है.’

फिल्म के प्रोड्यूसर प्रकाश झा कहते हैं कि

‘फिल्म में प्यार, सेक्स, रोमन्स, दिल टूटना, लालसा और जूनून है. लेकिन सबसे ज़्यादा इस फिल्म में जो चीज़ है, वो है इन चार औरतों के छोटे-छोटे सपने, जो अपने जीवन के दायरों में बंधी हुई हैं. परंपरा और आधुनिकता के विरोधाभासों के बीच एक औरत की इच्छाओं का क्या होता है और ये कब तक होता रहेगा? फिल्म की कहानी इतनी आकर्षक थी कि मुझे लगा कि ये बननी ही चाहिए.’

Lipstick Under My Burkha

ख़ैर, आप लोग भी इसका ट्रेलर देखकर मेरी बातों से इत्तेफ़ाक तो रख ही रहे होंगे. फिल्म 2 दिसंबर, 2016 को रिलीज़ होगी.

Source: Prakash Jha Productions, HT

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