श्रीकृष्ण ने धरती पर जन्म लिया था : वैज्ञानिक प्रमाण मिले

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श्रीकृष्ण ने धरती पर जन्म लिया था : वैज्ञानिक प्रमाण मिले : श्रीमद्भागवत गीता जैसा कालजयी ग्रन्थ संसार को देने वाले कर्मयोगी श्रीकृष्ण केवल हिन्दुओं के ही आस्था के केंद्र नहीं है, बल्कि दुनिया के कोने-कोने में उनमें परम विश्वास रखने वाले लोग रहते हैं. दुनिया के कई हिस्सों से लोग भारत की धरती पर सिर्फ़ कृष्ण की नगरी देखने और श्रीकृष्ण के लीलास्थलों को महसूस करने आते हैं. कहते हैं कि श्रीकृष्ण ने जो कुछ भी कहा है, उनका हर शब्द आज पांच हजार सालों बाद भी अक्षरशः चरितार्थ होता है. 

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उनकी शिक्षाओं को दूसरे धर्म के अनुयायी भी जीवन के लिए उपयोगी मानते हैं. श्रीकृष्ण धरती पर परमात्मा का रूप थे और हमारी आत्मा में उनका वास है. सदियों पूर्व वे आर्यावर्त की इस पवित्र धरती पर जन्म लेकर अधर्म के विनाश के नायक बने थे, ये सिर्फ आध्यात्म ही नहीं कहता, बल्कि अब उनका अस्तित्व ऐतिहासिक रूप से भी स्वीकार्य है. आध्यात्म को लोगों की मान्यताओं के आधार पर देखने वाले विज्ञान को अब तमाम ऐसे प्रमाण मिल चुके हैं, जिससे श्रीकृष्ण का अस्तित्व सिर्फ़ वैदिक ही नहीं, ऐतिहासिक भी सिद्ध होता है.


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पुरातात्विक प्रमाण


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महाभारत और भागवत पुराण में वर्णित द्वारका के अवशेष पानी के भीतर पाए गए हैं. उस समय के सिक्के भी प्राप्त हुए हैं, जिनमें कृष्ण से सम्बंधित चिह्न खुदे हुए हैं. इनसे ये प्रमाणित होता है कि श्रीकृष्ण और द्वारका के सम्बन्ध में लिखी गई बातें सत्य हैं.

पुरातात्विक ज्योतिषीय प्रमाण


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महाभारत में वर्णित खगोलीय घटनाओं के बारे में भी प्रमाण प्राप्त हुए हैं. पांच हजार साल पूर्व जब कलयुग की शुरुआत हुई थी, तो असामान्य खगोलीय घटना घटित हुई. सूरज, चन्द्रमा और 6 ग्रहों का संरेखण (एक लाइन में आना) हुआ था. आज हमारे पास ऐसे ज्योतिषीय सॉफ्टवेयर हैं, जिनकी मदद से हम पूर्वजों द्वारा देखी गई उन घटनाओं के बारे में जान सकते हैं. सॉफ्वेयर द्वारा किए गए अध्ययन में महाभारत में वर्णित खगोलीय घटना को सत्य पाया गया है.

साहित्यिक प्रमाण


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वैदिक साहित्य में श्रीकृष्ण के बारे में बहुत कुछ मिलता है, लेकिन अन्य धर्म ग्रन्थ भी उनके धरती पर जन्म लेने के तथ्य की पुष्ट करते हैं. बौद्ध धर्म के सूत्र पिटक और ललितविस्तर सूत्र में भी श्रीकृष्ण का वर्णन मिलता है. भले ही इन ग्रंथों में श्रीकृष्ण की शिक्षाओं की तारीफ नहीं की गई है, लेकिन इससे ये तो साफ़ है कि श्रीकृष्ण वैदिक धर्म द्वारा तैयार किए गए मिथक नहीं, बल्कि इसी धरती पर जन्म लेने वाले ईश्वर का रूप हैं.

इन प्रमाणों की वजह से दुनिया भर के विद्वानों ने श्रीकृष्ण को इतिहास का हिस्सा मान लिया है. ऐसा इतिहास जो अविश्वसनीय होते हुए भी सत्य है, पूर्ण सत्य. श्रीकृष्ण कर्म और प्रेम के मूर्तरूप हैं और उनका पूरा जीवन हमें अपने जीवन में कर्मयोगी बनने की प्रेरणा देता है.

The History and Culture of the Indian People किताब में इतिहासकार आर.सी. मजूमदारकहते हैं, ‘श्रीकृष्ण की ऐतिहासिकता के सम्बन्ध में अब लोगों के बीच आम सहमति और एक राय है.’

The Original Gita में Rudolf Otto कहते हैं, ‘श्रीकृष्ण एक ऐतिहासिक चरित्र थे, यह बात बिलकुल साफ है.’

श्रीकृष्ण ने धरती पर जन्म लिया था : वैज्ञानिक प्रमाण मिले

Source: Quora, Indianweekender

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