यहां महाकाल विराजते हैं 108 फीट के महाअवतार में, साथ ही हैं 1 करोड़ से ज़्यादा शिवलिंग

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भगवान शिव को आदि योगी शम्भू भी कहा जाता है. जब कुछ भी नहीं था, तब भी वो थे. विज्ञान चाहे भगवान में विश्वास करे या न करे लेकिन एनर्जी के बिना तो वो भी किसी वस्तु का अस्तित्व नहीं मानता है. यहीं से महादेव के वजूद को आधार मिलता है. एक तरह से कह सकते हैं कि जिसे विज्ञान एनर्जी कहता है आप उसे शिव कह सकते हैं. योग और ध्यान से एक उत्कृष्ट क्रम में एनर्जी का फ्लो बनता है. इसे योगियों ने सर्वप्रथम अपनाया था.

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संसार में उर्ज़ा न उत्पन्न होती है और न ही खत्म. उसका तो बस रूप परिवर्तित होता रहता है. उस उर्जा को हर समय एक माध्यम या कहें आधार की आवश्यकता होती है. शिवलिंग भी उर्जा को एक आधार प्रदान करता है.

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दुनिया में महादेव के अनेक शिवलिंग होंगे. विभिन्नता और विशेषता लिए ये पाए जाते हैं. ऐसी ही एक अनोखी विशेषता लिए एक शिवलिंग कर्नाटक के कोलर जिले के छोटे से गांव काम्मासांदरा में विराजमान है. इस जगह के कण-कण में आपको शिव का वास मिलेगा. यहां दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग है, जिसकी ऊंचाई 108 फीट है. इसके साथ ही यहां 1 करोड़ और अलग-अलग आकार के शिवलिंग स्थापित है. इसी वजह से इस स्थान को कोटिलिंगेश्वर नाम से जाना जाता है.


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इतने शिवलिंग होने के पीछे यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाओं और भक्ति का हाथ है. यहां जब भी कोई श्रद्धालु आता है, तो अपनी मनोकामना के साथ ही सामर्थ्य अनुसार 1 फीट से लेकर 3 फीट तक का शिवलिंग यहां स्थापित करवा देता है. इसी तरह बढ़ते-बढ़ते आज इनकी संख्या 1 करोड़ तक पहुंच गई है.


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यहां जब महादेव अपने विशाल रूप में विराजमान है, तो नंदी कहां पीछे रहने वाले है. यहां नंदी भी 35 फीट उंचे, 60 फीट लम्बे और 40 फीट चौड़े आकार के साथ अपने प्रभु के समक्ष बैठे हैं.


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इस मन्दिर प्रांगण में कोटिलिंगेश्वर के मुख्य मन्दिर के अलावा 11 मन्दिर और भी है. जिनमें विष्णुजी, ब्रह्माजी, पंचमुखी गणेश, राम-लक्ष्मण-सीता, अन्नपूर्णेश्वरी देवी के प्रमुख है. इसके साथ ही इस मन्दिर की ख़ासियत है कि यहां मौजूद दो वृक्षों पर पीले रंग का धागा बांध देने पर फरियादी की हर मनोकामना पूरी हो जाती है. ख़ासतौर पर अगर किसी की ज़िन्दगी में शादी-ब्याह में कोई अड़चन आ रही हो.


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यह मन्दिर आस्था के साथ-साथ सामाजिक उत्कृष्टता का भी अनोखा उदाहरण पेश करता है. मन्दिर कमेटी की तरफ़ से यहां निर्धन परिवारों की बेटियों की शादी 200 रुपये का मामूली शुल्क लेकर करवाई जाती है. जिसमें सारी व्यवस्था की जिम्मेदारी मन्दिर उठाता है. इसके साथ ही दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रहने और खाने की भी व्यवस्था की जाती है.


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इस मन्दिर में शिवरात्रि का पर्व सबसे प्रमुख आकर्षण होता है. इस दिन यहां लाखों की भीड़ जमा हो जाती है. यहां दिन में दो बार आरती करके भोलेनाथ की आराधना की जाती है. एक आरती सुबह 6 बजे होती है और दूसरी शाम को 6 बजे.

श्रृष्टि का संहारक होने के बावजूद अपने भोले स्वभाव के कारण महादेव का अपना एक अलग ही आकर्षण है और जहां आपको 100 फीट से बड़े आकार के प्रभु के दर्शन हो जाये, तो फिर चारों तरफ़ बस भक्तिभाव का एहसास ही शेष रह जाता है, बाकी सब शून्य. आप भी इस असीम आनन्द को महसूस करना चाहते हैं ,तो यहां अवश्य जाकर आयें.

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