अमेरिका और रूस को पछाड़ , अन्तरिक्ष का बादशाह बनने वाला है भारत

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अमेरिका और रूस को पछाड़ , अन्तरिक्ष का बादशाह बनने वाला है भारत : अगले साल नए वर्ष के मौके पर जनवरी में भारत वो कारनामा करने जा रहा है जिसके बाद अंतरिक्ष में भारत का परचम लहराएगा. मंगल मिशन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर एस. अरुणन ने बताया कि इसरो अगले साल जनवरी में एकसाथ 82 सैटेलाइट लॉन्च कर विश्व रिकॉर्ड बना सकता है.

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अभी तक एकसाथ सबसे ज्यादा सैटेलाइट लॉन्च करने का रिकॉर्ड रूस के नाम है. उसने 19 जून 2014 को एक साथ 37 सैटेलाइट लॉन्च कर यह कीर्तिमान बनाया था. जबकि एक साथ 29 सैटेलाइट लॉन्च कर अमेरिका दूसरे नंबर पर है. अंतरिक्ष में सैटेलाइट भेजने के मामले में भारत का तीसरा स्थान है.

अमेरिका और रूस को पछाड़ , अन्तरिक्ष का बादशाह बनने वाला है भारत
अमेरिका और रूस को पछाड़ , अन्तरिक्ष का बादशाह बनने वाला है भारत

आपको बता दें कि भारत जिन 82 सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहा है. उनमें 60 अमेरिका और 20 यूरोप तथा दो यूके में बने सैटेलाइट हैं. इन सभी को पीएसएलवी रॉकेट के एडवान्स्ड वर्जन यानी पीएसएलबी-एक्सएल से लॉन्च किया जाएगा.

24 सितंबर 2014 को इसरो ने अपने पहले ही प्रयास में मंगल की ऑर्बिट में अपने मंगलयान उपग्रह को भेजकर कीर्तिमान बनाया था. इससे पहले दुनिया का कोई भी देश अपने पहले प्रयास में मंगल पर उपग्रह भेजने में सफल नहीं हुआ था.

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भारत यदि जनवरी में 82 सैटेलाइट भेजने में कामयाब रहता है तो ढाई साल में इसरो का यह दूसरा विश्व रिकॉर्ड होगा.

जहां तक भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की बात है तो इसकी गिनती दुनिया में आधुनिकतम और भरोसेमंद कार्यक्रम में होती है. इसरो यानी भारत का राष्ट्रीय अंतरिक्ष संस्थान में लगभग सत्रह हजार कर्मचारी एवं वैज्ञानिक कार्यरत हैं.

आपको जानकार हैरानी होगी कि भारत का पीएसएलवी इस वक्त दुनिया का सबसे भरोसेमंद सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल है. 1993 से अब तक पीएसएलवी से 37 बार सैटेलाइट लॉन्चिंग हो चुकी हैं. इतना ही नहीं जून 2016 तक इसरो लगभग 20 अलग-अलग देशों के 57 उपग्रहों को लॉन्च कर चुका है.

इतना ही नहीं दुनिया की बाकी सैटेलाइट लॉन्चिंग एजेंसियों के मुकाबले भारत की एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन की लॉन्चिंग 10 गुना सस्ती है. मंगलयान के सफल प्रक्षेपण के लगभग एक वर्ष बाद इसरो ने 29 सितंबर 2015 को एस्ट्रोसैट के रूप में भारत की पहली अंतरिक्ष वेधशाला स्थापित किया.

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