पाकिस्तान में सेना को दिया तख्तापलट का बुलावा

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पाकिस्तान में सेना को दिया तख्तापलट का बुलावा नई दिल्ली। पाकिस्तान के दर्जन भर शहर रातोंरात आर्मी चीफ जनरल राहिल शरीफ के पोस्टरों से पट गए है। इन पोस्टरों में लिखा है कि राहिल शरीफ आप देश की कमान संभालो। आर्मी चीफ राहिल शरीफ इस साल नवंबर में रिटायर होने वाले हैं। लेकिन इन पोस्टरों के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या वो रिटायरमेंट नहीं लेंगे?या कहीं फौज, नवाज शरीफ सरकार का तख्ता पलटने की तैयारी में तो नहीं है।

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पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद समेत दर्जन भर शहरों में आर्मी चीफ राहिल शरीफ के 10 हजार से ज्यादा ऐसे पोस्टर लगे हैं। हर पोस्टर में जनरल राहिल शरीफ से उनके पद पर बने रहने की गुजारिश की गई है, लेकिन पोस्टरों में लिखी इबारतें सिर्फ यहीं नहीं खत्म हुईं। कुछ पोस्टरों में तो सीधे-सीधे पाकिस्तान की नवाज शरीफ सरकार के खिलाफ बगावत नजर आती है। ये पोस्टर कराची, रावलपिंडी, लाहौर, पेशावर और हैदराबाद जैसे शहरों की भीड़भाड़ भरी सड़कों पर लगे हैं।

पोस्टर :पाकिस्तान में सेना को दिया तख्तापलट का बुलावा
पोस्टर :पाकिस्तान में सेना को दिया तख्तापलट का बुलावा

पूरे पाकिस्तान में जनरल राहिल शरीफ के पोस्टरों की चर्चा हो रही है लेकिन आश्चर्यजनक तरीके से पाकिस्तान सरकार, विपक्षी पार्टियां और तमाम जानकार इस मुद्दे पर खामोश हैं। हालांकि कुछ जानकारों का कहना है कि इन पोस्टरों के पीछे पाकिस्तानी फौज के किसी बड़े अफसर का भी हाथ हो सकता है।

पाकिस्तान में सेना को दिया तख्तापलट का बुलावा

पोस्टरों के पीछे फौज का हाथ होने की बात इसलिए उठ रही है क्योंकि रातोंरात पाकिस्तान के 13 बड़े शहरों में 10 हजार से ज्यादा पोस्टर बगैर सेना को भरोसे में लिए नहीं लगाए जा सकते। बता दें कि  आर्मी चीफ राहिल शरीफ का कार्यकाल इसी साल 30 नवंबर को खत्म हो रहा है। यानी उनके पास काम करने के लिए सिर्फ 4 महीने बचे हैं। उनके तमाम समर्थक चाहते हैं कि वो अपने पद पर बने रहें, लेकिन राहिल शरीफ ने साफ कर दिया है कि वो एक्सटेंशन नहीं लेंगे और नवंबर में तय समय पर अपने पद से रिटायर हो जाएंगे।

जानकारी के मुताबिक इन पोस्टरों को लगाने वाले शख्स का नाम अली हाशमी है। जो मूव ऑन पाकिस्तान नाम की पार्टी का नेता है। पाकिस्तान में फिलहाल लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार है। ऐसे में आर्मी चीफ से सत्ता संभालने की अपील करना अलोकतांत्रिक है, लेकिन अली हाशमी के पास इन पोस्टरों को लगाने के पीछे तगड़ी दलील है।

पाकिस्तान में सेना को दिया तख्तापलट का बुलावा
पाकिस्तान में सेना को दिया तख्तापलट का बुलावा

अली हाशमी का कहना है कि इलाज के सिलसिले में नवाज शरीफ 40 दिन तक पाकिस्तान से बाहर थे। इस दौरान आर्मी चीफ ने लोगों को सरकार की कमी महसूस नहीं होने दी। हाशमी का तो यहां तक कहना है कि आर्मी चीफ को देश की सत्ता संभाल लेनी चाहिए। अब कोई और विकल्प नहीं बचा है। जनरल राहिल शरीफ आप पाकिस्तान में मार्शल लॉ लागू करो और अपनी सरकार बनाकर देश चलाओ।

पाकिस्तान की सत्ता में सेना का दखल हमेशा से रहा है। तख्तापलट कर देश का शासन अपने हाथ में लेना पाकिस्तानी फौज के लिए कोई नई बात नहीं है, हालांकि जनरल राहिल शरीफ ने कभी तख्तापलट के संकेत नहीं दिए लेकिन सरकार के कामकाज में उनकी पूरी दखल रहती है। आर्मी चीफ राहिल शरीफ कई बार प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके मंत्रियों को मशवरा देते नजर आते हैं। पाकिस्तान की जनता भी बहुत हद तक जानती-समझती है कि देश में आर्मी के ऊपर कोई नहीं है। लिहाजा उनकी उम्मीदें भी आर्मी चीफ पर ही टिकी हैं। मई में कराची में मशहूर कव्वाल अमजद साबरी की हत्या के बाद उनके परिजनों ने पुलिस या सरकार से नहीं बल्कि सीधे-सीधे आर्मी चीफ राहिल शरीफ से मदद की गुहार लगाई थी।

जिस वक्त कव्वाल अमजद साबरी की हत्या हुई उस वक्त प्रधानमंत्री नवाज शरीफ लंदन में इलाज कराने गए थे। अमजद साबरी की हत्या के बाद जनरल राहिल शरीफ पाकिस्तान के गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नसीर जांजुआ को लेकर कराची पहुंचे थे उन्होंने कानून व्यवस्था पर बैठक भी की साथ ही अमजद साबरी के घरवालों से भी मुलाकात की। वैसे ये पहला मौका नहीं था जब जनरल राहिल शरीफ ने चुनी हुई सरकार के ऊपर जाकर कोई कदम उठाया था।

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इसी साल अप्रैल में भारत से बातचीत के बाद पाकिस्तानी विदेश सचिव एजाज चौधरी को लाहौर बुला लिया था ताकि वो प्रधानमंत्री से पहले आर्मी चीफ को ब्रीफ कर सकें मई महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे के परेशान होकर राहिल शरीफ ने पूरी पाकिस्तान कैबिनेट को ही रावलपिंडी आर्मी हेडक्वॉर्टर में तलब कर लिया था।

बता दें कि पाकिस्तान में आर्मी चीफ को अपने मुताबिक फौजी नियम बनाने का अधिकार है। ऐसे में अगर कोई नया आर्मी चीफ आया तो वो अपने हिसाब से नियमों में बदलाव करेगा और इसका असर अमेरिका, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के सामरिक संबंधों पर भी पड़ेगा। इसीलिए अमेरिका भी चाहता है कि राहिल शरीफ नवंबर के बाद भी आर्मी चीफ बने रहें।

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