ये हैं देश की पहली महिला कमांडो प्रशिक्षक, देती हैं भारतीय सैनिकों को प्रशिक्षण

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डॉ. सीमा राव भारत की अकेली महिला कमांडो प्रशिक्षक हैं। आइए जानते है सीमा राव की उपलब्धियों के बारे में।

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सीमा पिछले 20 सालों से भारतीय सेना के जवानों को ट्रेनिंग दे रही हैं, जिसके लिए वह कोई फीस नहीं लेतीं।

सीमा इंडियन पैरा स्पेशल फोर्सेस, कमांडो विंग, विभिन्न अकादमियों, नेवी मारकोस मरीन कमांडो, एनएसजी, वायु सेना गरुड़, आईटीबीपी, पैरामिलिट्री और पुलिस के जवानों को प्रशिक्षण देती हैं।

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दुनिया में मार्शल आर्ट की सबसे कठिन ट्रेनिंग सर्टिफिकेट होती है ‘जीत कुने दो’। इसे ब्रूस ली ने वर्ष 1967 में शुरू किया था। अब तक यह सर्टिफिकेट दुनिया की जिन 10 महिलाओं ने हासिल किया है, उसमें एक नाम भारत की डॉ. सीमा राव का भी है।

सीमा कॉम्बेट शूटिंग इंस्ट्रक्टर हैं। इनके इस कार्य में सीमा के पति दीपक राव भी उनकी मदद करते हैं। दीपक अभी तक लगभग 15 हजार जवानों को ट्रेनिंग दे चुके हैं।

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सीमा को वह दौर भी देखना पड़ा है, जब वह गंभीर आर्थिक समस्या से जूझ रहीं थीं। इसके बावजूद इस दंपति ने कभी अपनी ट्रेनिंग की फीस नहीं ली। अपने काम की वजह से सीमा अपने पिता के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सकी थीं।

सीमा एक सर्टिफाइड डॉक्टर भी हैं। उन्होंने क्राइसिस मॅनेज्मेंट में MBA की डिग्री भी ले रखी है। साथ ही पीएचडी भी पूरा कर चुकी हैं।

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सीमा को घर में देशभक्ति का माहौल विरासत में मिला है। उनके पिता प्रो. रमाकांत सिनारी स्वतंत्रता सेनानी रह चुके हैं। बचपन से सेना के लिए काम करने के सपना को पूरा करने के लिए सीमा ने मार्शल आर्ट 12 साल की उम्र में ही सीखना शुरू कर दिया था।

सीमा अपने इस कार्य को लेकर काफ़ी गंभीर रहती हैं। एक बार तो उन्हें सिर में इतनी गंभीर चोट आई थी कि उनकी याद्दाश्त ही चली गई थी। वह अपने पति को भी नहीं पहचान पा रहीं थीं। इलाज के बाद वह ठीक हो गईं। और तो और अपने देश के प्रति ज़िम्मेदारी को निभाने के लिए उन्होने एक बेटी गोद लिया है।

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सीमा एक लेखक भी हैं। वह कई किताबें भी लिख चुकी हैं। उन्होंने Close Combat Ops Training पर पहला एन्साइक्लोपीडिया लिखा है। सीमा  वैश्विक आतंकवाद पर भी किताब लिख चुकी हैं।

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इन सब के अलावा सीमा मिस इंडिया वर्ल्ड के फाइनलिस्ट्स में भी शामिल हो चुकीं हैं।

Source : topyaps

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