15 अगस्त के 15 सच, गांधी जी के टूटे थे तमाम सपने!

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नई दिल्ली: हर साल 15 अगस्त के दिन पूरा भारत स्वतंत्रता दिवस के रंग में रंगा रहता है। हर किसी के चेहरे पर एक अलग सी खुशी नजर आती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस दिन ऐसी क्या खास बात थी जो 15 अगस्त को ही चुना गया और ऐसा क्या राज था कि वर्ष 1947 में ही स्वतंत्रता का ऐलान किया गया। 15 अगस्त 2016 को भारत अपना 70वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है स्वतंत्रता दिवस से पूर्व हम आपको बतातें हैं 15 अगस्त के ऐसे 15 सच जिन्हें पढ़कर आप भी रह जाएंगे हैरान।
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पहला सच: 1947 ही क्यों?
शुरूआती योजना के अनुसार भारत को जून, 1948 में आजादी मिलने का प्रावधान था। वाइसराय बनने के तुरंत बाद, लार्ड माउंटबेटन की भारतीय नेताओं से बात शुरू हो गई थी जिसके चलते आजादी 1948 की जगह 1947 में ही देने की बात तय हो गई।
दूसरा सच: 15 अगस्त ही क्यों?
गांधी जी के जनांदोलन और सुभाष चन्द्र बोस की हिन्द फौज की गतिविधियों से देश की जनता आजादी के लिए जागरूक हो गई थी। 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ती के बाद अंग्रेजों की आर्थिक स्थिती काफी प्रभावित हुई थी। लार्ड माउंटबेटन 15 अगस्त की तारीख को शुभ मानते थे क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के समय 15 अगस्त, 1945 को जापानी आर्मी ने आत्मसमर्पण किया था और उस समय लार्ड माउंटबेटन अलाइड फोर्सेज के कमांडर थे।
तीसरा सच: रात 12 बजे ही क्यों?
जब लार्ड माउंटबेटन ने आजादी की तारीख 3 जून, 1948 से 15 अगस्त, 1947 कर दी तो देश के ज्योतिषियों में खलबली मच गई। उनके अनुसार ये तारीख अमंगल थी, लेकिन बेटन 15 अगस्त पर ही अडिग़ थे। जिसके बाद ज्योतिषियों ने उपाय निकाला। उन्होंने 14 और 15 अगस्त की रात 12 बजे का समय तय किया। कारणवश जवाहर लाल नेहरू ने अपनी स्पीच रात 12 बजे तक खत्म करके शंखनाद किया।
चौथा सच: आजादी के दिन क्यों नहीं शामिल हुए गांधी जी?
कहने को तो यह भी कहा जाता है जिस दिन भारत को आजादी मिल रही थी उस दिन महात्मा गांधी दिल्ली नोखाली में हिंदू मुसलमान के बीच चल रहे दंगों को रोकने के लिए अनशन पर बैठे थे। जिस व्यक्ति ने ताउम्र देश की सेवा में गुजार दी भला वह देश की आजादी का हिस्सा कैसे नहीं बनता। इस दिन कांग्रेस के बड़े नेता गांधी जी को बुलाने गए थे लेकिन गांधी जी ने साफ इनकार कर दिया। गांधी जी ने नोखाली से प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कहा कि मैं हिन्दुस्तान के उन करोड़ों लोगों को ये संदेश देना चाहता हूं कि ये जो तथाकथित आजादी आ रही है ये मैं नहीं लाया ये सत्ता के लालची लोग सत्ता के हस्तांतरण के चक्कर में फंस कर लाए हैं।

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