IIT बॉम्बे के छात्रों द्वारा बनाया गया सैटेलाइट ‘प्रथम’ लॉन्च होगा, फिर भारत का डंका बजेगा

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IIT बॉम्बे के छात्रों द्वारा बनाया गया सैटेलाइट ‘प्रथम’ लॉन्च होगा, फिर भारत का डंका बजेगा : पिछले 9 सालों का लंबा इंतज़ार अब खत्म होने को है. आईआईटी बॉम्बे के स्टूडेंट्स द्वारा डिजाइन्ड और विकसित किया गया सैटेलाइट ‘प्रथम’ का इंतज़ार अब खत्म होने को है. पिछले नौ सालों से इस सेटेलाइट के लॉन्च की बात चल रही थी, लेकिन किन्हीं कारणों से यह संभव नहीं हो पा रहा था. पर इस साल आखिरकार यह लॉन्च होने जा रहा है.

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आईआईटी बॉम्बे के स्टूडेंट ऐतिहासिक सैटेलाइट ‘प्रथम’ को 26 सितंबर को लॉन्च करेंगे.

IIT बॉम्बे के छात्रों द्वारा बनाया गया सैटेलाइट ‘प्रथम’ लॉन्च होगा, फिर भारत का डंका बजेगा
IIT बॉम्बे के छात्रों द्वारा बनाया गया सैटेलाइट ‘प्रथम’ लॉन्च होगा, फिर भारत का डंका बजेगा

सबसे खास बात ये है कि यह पहली बार होगा, जब मौसम सैटेलाइट इनसैट-3 DR के सफल लांन्चिंग के महज़ 18 दिनों बाद कक्षा में दूसरा सैटेलाइट SCATSAT-1 भेजा जाएगा.

IIT बॉम्बे के छात्रों द्वारा बनाया गया सैटेलाइट ‘प्रथम’ लॉन्च होगा, फिर भारत का डंका बजेगा
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Source: jagran

26 सितंबर को यह सैटेलाइट श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से लॉन्च किया जाएगा. लगभग 10 किलोग्राम वजन वाले ‘प्रथम’ मुंबई का भी पहला अपना सैटेलाइट है. इसे PSLV से सुबह 9.30 बजे लॉन्च किया जाएगा.

इतिहास में यह पहली बार होगा, जब फोर स्टेज पीएसएलवी दो अलग-अलग कक्षाओं में सैटेलाइट लॉन्च करेगा.

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Source: binocularsmedia

गौरतलब है कि ‘प्रथम’ या ‘SCATSAT-1 ’पहला सैटेलाइट कार्यक्रम है, जिसे देश में स्टूडेंट्स के द्वारा शुरू किया गया. इसे पांच साल के सागर और मौसम का अध्ययन करने के लिए भेजा जाएगा. इसके अलावा प्रथम के साथ अल्‍जीरिया, कनाडा और अमेरिका के साथ बंगलूरु के बनाए गए सैटेलाइट शामिल होंगे.

दरअसल, मुख्य सैटेलाइट 720 किलोमीटर की ऊंचाई पर सूर्य-स्थैतिक कक्षा में रहेगा. इन सैटेलाइट से होने वाले वैज्ञानिक अध्ययन से संचार त्रुटियों को ठीक करने में मदद मिलेगी और सुनामी की चेतावनी में भी मदद मिलेगी. इसके सफल प्रक्षेपण से मौसम का सटीक अंदाज़ा लगाने में काफ़ी सहायता मिलेगी.

IIT बॉम्बे के छात्रों द्वारा बनाया गया सैटेलाइट ‘प्रथम’ लॉन्च होगा, फिर भारत का डंका बजेगा
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Source: jagran

इस तरह तकनीक के क्षेत्र में भारतीय छात्रों ने अंतरिक्ष विज्ञान में एक नया आयाम हासिल करने की ओर अपना कदम बढ़ा दिया है.

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