सेब उत्पादन में न्यूजीलैंड और चीन को पछाड़ देगा हिमाचल

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पुरानी व परंपरागत सेब किस्मों को हटाकर विदेशी किस्में लगाई जाएंगी। इससे प्रति हैक्टेयर सेब उत्पादन बढ़ेगा। इस समय हिमाचल में प्रति हैक्टेयर 12 से 15 मीट्रिक टन उत्पादन हो रहा है। बागवानी मिशन के लागू और सफल होने के बाद यह उत्पादन बढ़कर 60 मीट्रिक टन तक हो जाएगा। मिशन को लागू करने से पहले बागवानी विभाग विदेशी विशेषज्ञों की सहायता ले रहा है। साथ ही बागवानों के सुझावों को भी इसमें शामिल किया जा रहा है।

मंगलवार को शिमला में इस संदर्भ में एक बैठक का आयोजन किया गया। हिमाचल सरकार इस संदर्भ में हॉलैंड और न्यूजीलैंड के विशेषज्ञों की सहायता ले रही है। मिशन के तहत हिमाचल में सेब के पुराने पौधों को उखाड़कर बागवानों की डिमांड के मुताबिक ही विदशों किस्मों के क्लोनल रूट स्टॉक एमएम 106, एम 9, ईमला 9 इत्यादि सहित आधुनिक वैरायटी के स्कालेट स्पर टू, रेडलम गाला, जेरोमाइन, स्पर आदि सेब किस्में लगाई जाएंगी। ये किस्में कम स्पेस घेरती हैं और जल्द उत्पादन देती हैं।

मिशन लागू, अगले महीने होंगे विदेशी पौधों के टेंडर
राज्य में अगस्त के पहले ही सप्ताह में मिशन को औपचारिक तौर पर लागू किया गया है। अब बागवानी विभाग
सितंबर महीने में विदेशी किस्मों के सेब, नाशपाती, पलम व चैरी के पौधे खरीदने के लिए टेंडर लगाने जा रहा है। विदेशी किस्मों के ये रूट स्टॉक बागवानों व विशेषज्ञों की सहमति से खरीदे जाएंगे। मंगलवार को बागवानी विभाग के निदेशालय में इस मिशन पर चर्चा के लिए प्रदेश भर से बुलाए गए बागवानों के साथ बैठक की गई।

हिमाचल का होगा कायापलट
बागवानी विभाग के प्रधान सचिव जेसी शर्मा के अनुसार 1169 करोड़ रुपए का ये प्रोजेक्ट अगले सात साल तक के लिए लागू रहेगा। प्रदेश के छोटे व सीमांत बागवानों को इस मिशन से लाभ होगा। मिशन के तीन कंपोंनेट होंगे। इसमें पहला कंपोंनेट प्रोडेक्शन व प्रोडेक्टिविटी बढ़ाना होगा। दूसरे कंपोनेंट में कोल्ड स्टोर सहित ग्रेडिंग व पैकिंग इत्यादि के लिए ढांचा तैयार किया जाएगा। तीसरे कंपोनेंट में वेल्यू एडिशन के तहत प्रोसेसिंग यूनिट विकसित किए जाएंगे।

विदेशों में कई जगह प्रति हेक्टेयर 90 मीट्रिक टन सेब उत्पादन किया जा रहा है। हिमाचल में पिछले 40 सालों से यही सेब उत्पादन 10 से 12 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है। बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. डीपी भंगालिया ने कहा कि वैश्वीकरण के इस दौर में हिमाचल में सेब की उन्नत किस्में लगाया जाना जरूरी है। हिमाचल को समय रहते परंपरागत बागवानी से बाहर आना होगा, नहीं तो विदेश के बागवान पूरे विश्व के सेब बाजार पर एकाधिकार कर लेंगे। सेब उत्पादन में हिमाचल ही विश्व को टक्कर दे सकता है।

यहां बता दें कि कश्मीर में बेशक सेब का अच्छा उत्पादन होता है, लेकिन वहां के अशांत माहौल से बागवानी को नुकसान हो रहा है। इसके अलावा उत्तराखंड व अरुणाचल प्रदेश में भी सेब पैदा किया जाता है, लेकिन ये हिमाचल से काफी पीछे हैं। ऐसे में हिमाचल को मिले 1169 करोड़ रुपए के मिशन से यह पहाड़ी राज्य विश्व के सेब नक्शे पर चमक उठेगा।

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