हिन्दू गोत्र प्रणाली : अनुवांशिक विज्ञान : Genetics Science

11897
Prev1 of 6Next
Use your ← → (arrow) keys to browse

पाठकों के समक्ष गोत्र प्रणाली का समस्त विज्ञान , ये थप्पड़ है उन लोगो के नाम जो गोत्र प्रणाली को बकवास कहते है  

गोत्र प्रणाली में गौत्र शब्द का अर्थ होता है वंश/कुल (lineage)

गोत्र प्रणाली
गोत्र प्रणाली
गोत्र प्रणाली का मुख्या उद्देश्य किसी व्यक्ति को उसके  मूल प्राचीनतम व्यक्ति से जोड़ना है उदहारण के लिए यदि को व्यक्ति कहे की उसका गोत्र भरद्वाज है तो इसका अभिप्राय यह है की उसकी पीडी वैदिक ऋषि भरद्वाज से प्रारंभ होती है या ऐसा समझ लीजिये की वह व्यक्ति ऋषि भरद्वाज की पीढ़ी में जन्मा है ।
इस प्रकार गोत्र एक व्यक्ति के पुरुष वंश में मूल प्राचीनतम व्यक्ति को दर्शाता है.
The Gotra is a system which associates a person with his most ancient or root ancestor in an unbroken male lineage.

आकर्षक ऑफर के लिए यहाँ क्लिक करें

ब्राह्मण स्वयं को निम्न आठ ऋषियों (सप्तऋषि +अगस्त्य ) का वंशज मानते है ।

जमदग्नि, अत्रि , गौतम , कश्यप , वशिष्ठ ,विश्वामित्र, भरद्वाज, अगस्त्य

Brahmins identify their male lineage by considering themselves to be the descendants of the 8 great Rishis ie Saptarshis (The Seven Sacred Saints) + Agastya Rishi
उपरोक्त आठ ऋषि मुख्य गोत्रदायक ऋषि कहलाते है ।  तथा इसके पश्चात जितने भी अन्य गोत्र अस्तित्व में आये  है वो इन्ही आठ मे से एक से फलित हुए है और स्वयं के नाम से गौत्र स्थापित किया . उदा० माने की
अंगीरा की ८ वीं  पीडी में कोई ऋषि क हुए तो परिस्थतियों के अनुसार  उनके नाम से गोत्र चल पड़ा। और इनके वंशज क गौत्र कहलाये किन्तु क गौत्र स्वयं अंगीरा से उत्पन्न हुआ है ।

इस प्रकार अब तक कई गोत्र अस्तित्व में है । किन्तु सभी का मुख्य गोत्र आठ मुख्य गोत्रदायक ऋषियों मेसे ही है ।
All other Brahmin Gotras evolved from one of the above Gotras. What this means is that the descendants of these Rishis over time started their own Gotras. All the  established Gotras today , each of them finally trace back to one of the root 8 Gotrakarin Rishi.

गौत्र प्रणाली में पुत्र का महत्व  |  Importance of Son in the Gotra System:

जैसा की हम देख चुके है गौत्र द्वारा पुत्र व् उसे वंश की पहचान होती है । यह गोत्र पिता से स्वतः ही पुत्र को प्राप्त होता है । परन्तु पिता का गोत्र पुत्री को प्राप्त नही होता ।  उदा ०  माने की एक व्यक्ति का  गोत्र अंगीरा है
और उसका एक पुत्र है । और यह पुत्र एक कन्या से विवाह करता है जिसका पिता कश्यप गोत्र से है । तब लड़की का गोत्र स्वतः ही गोत्र अंगीरा में परिवर्तित हो जायेगा जबकि कन्या का पिता कश्यप गोत्र से था ।

इस प्रकार पुरुष का गोत्र अपने पिता का ही रहता है और स्त्री का पति के अनुसार होता है न की पिता के  अनुसार ।
यह हम अपने देनिक जीवन में देखते ही है , कोई नई  बात नही !
परन्तु ऐसा क्यू ?

पुत्र का गोत्र महत्वपूर्ण और पुत्री का नही । क्या ये कोई  अन्याय है ??
बिलकुल नही !!
देखें कैसे :

गोत्र प्रणाली

Prev1 of 6Next
Use your ← → (arrow) keys to browse
loading...