एक गुफा में स्थित यूरोपीय प्रयोगशाला को रहस्यमयी बना देती हैं भगवान शिव की प्रतिमा

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नयी दिल्ली: मानवीय बलिदान, भगवान शिव की प्रतिमा, परमाणु संस्थान, गॉड पार्टिकल जैसी चीजें एक गुफा में स्थित यूरोपीय प्रयोगशाला को रहस्यमयी बना देती हैं। जिनेवा स्थित यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन या सीईआरएन का एक भयावह वीडियो सामने आने के बाद इस विज्ञान संस्थान की मानवीय बलिदान की कहानी सामने आयी जिसमें 100 से अधिक देश सहयोग कर रहे हैं।

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मामले से जुड़ी सच्चाई का पता लगाने के लिए सर्न (सीआईआरएन) ने एक आंतरिक जांच शुरू किया है। हालांकि संगठन ने वीडियो की सच्चाई की पुष्टि की है, जिसे अत्यधिक सुरक्षित क्षेत्र में रिकार्ड किया गया है लेकिन साथ ही इसे काल्पनिक चित्रण भी करार दिया। इस वीडियो से कई वैज्ञानिक सकते में हैं, खासकर भारत के। ऐसा इसलिए क्योंकि ‘मानवीय बलिदान’ को भगवान शिव की विशाल प्रतिमा की पृष्ठिभूमि में किया गया है जो नटराज के रूप में ‘तांडव’ कर रहे हैं।

भारत सरकार ने जिनेवा स्थित परमाणु अनुसंधान केंद्र को करीब एक दशक पहले पांच मीटर उंची प्रतिमा भेंट की था। वैज्ञानिकों के अप्रासंगिक कृत्यों का जो वीडियो सामने आया है, वह सिर्फ सीईआरएन की कहानी नहीं कहता है बल्कि कई देशों में ऐसा आम तौर पर होता है।

इससे पहले अमेरिका में नासा के ग्रह मिशन नियंत्रण कक्ष के इंजीनियर एक उपग्रह को मंगल की कक्षा में स्थापित करने के समय बेतकल्लुफ होकर मूंगफली खाते देखे गये क्योंकि वे इसे शगुन की दृष्टि से अच्छा मानते हैं। इसके अलावा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन :इसरो: के शीर्ष अधिकारी भी अपने निजी समय में एक रॉकेट के प्रक्षेपण से पहले आशीर्वाद लेने के लिए तिरूपति स्थित बालाजी मंदिर गये थे और उन्होंने रॉकेट और उपग्रहों के छोटे मॉडलों को भगवान के समक्ष रखने की आदत बना ली है। अज्ञात शक्तियों का भय विज्ञान की तरफ उन्मुख लोगों को ये सब करने पर मजबूर करता है लेकिन सर्न में जो हुआ, उसे सबसे विचित्र की संज्ञा दे सकते हैं।

संभवत: एक मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किये गये वीडियो में भगवान शिव के तांडव नृत्य की पृष्ठभूमि में करीब छह से सात लोगों को रात में काले शैतानी लबादे में देखा जा सकता है और एक अन्य व्यक्ति, संभवत: एक महिला, शिव की प्रतिमा के सामने बली वेदी पर लेटी हुई है और शैतानी लबादे में वहां मौजूद लोगों में से एक कटार खींचता है और उसे महिला का गला काटते हुए दिखाया गया है।

अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए सर्न के प्रवक्ता ने कहा, ‘इस वीडियो के दृश्य काल्पनिक हैं। सर्न में और इससे जुड़े आवास में विश्व भर के वैज्ञानिक अपने काम के सिलसिले में आते हैं। सर्न में 24 घंटे और 365 दिन शिफ्ट में काम होता है और आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है। सर्न में जिन लोगों को प्रवेश का अधिकार है वे कभी-कभी अपने हास्य बोध का परिचय देते हैं, और इस बार भी ऐसा ही हुआ है। वीडियो कार्यालय के एक भवन में बनाया गया है, इस तकनीकी और प्रयोग वाले स्थान पर किसी के भी अनाधिकृत प्रवेश को रोकने के लिए सुरक्षा प्रबंध चाक चौबंद है। सर्न इस तरह के मजाक को माफ नहीं कर सकता, जो सर्न के पेशेवर दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हों और एक आंतरिक जांच चल रही है।’

पल्लव बाग्ला

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