विदेश नीति के मोर्चे पर नेहरू से भी आगे निकले मोदी, किया ये चमत्कार..

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विदेश नीति के मोर्चे पर नेहरू से भी आगे निकले मोदी : 26 मई 2016 की आहट के साथ ही केंद्र की मोदी सरकार ने आखिरकार अपने कार्यकाल के दो साल पूरे कर लिए हैं। वैसे तो इन दो सालों में मोदी की अगुआई सरकार की बहुत सी उपलब्‍धियां रहीं हैं, लेकिन इस सरकार का सबसे शानदार परफॉर्मेंस विदेशनीति के मोर्चे पर रहा है।

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एक तरह से देखा जाए तो दुनिया के सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देश भारत की विदेश नीति के संदर्भ मे ऐसा कहा जाता है कि यहां सामान्यतः प्रति 5 साल मे सत्ता का स्थानांतरण तो होता है, परंतु विदेश नीति के स्वरूप और आधारभूत ढांचे मे कोई खासा परिवर्तन नहीं होता। भारतीय विदेश नीति की संरचना और रूपरेखा का रेखांकन प्रधानमंत्री द्वारा ही होता है। अगर बात की जाए पूर्व प्रधानमंत्रियो की तो देश की विदेश नीति की नींव रखने वाले सर्वप्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर डॉ.मनमोहन सिंह की विदेश-नीति प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर बड़ी नपी-तुली और लचीली दिखाई देती है।

दरअसल, देश मे राजीव गांधी सरकार के बाद से ही केंद्र मे लगभग सभी गठबंधन वाली ‘मजबूर’ सरकारें काबिज रही है, और ऐसा माना जाता है कि ऐसी ‘लाचार-सरकारों’ की अपनी ही कुछ मजबूरियां एवं कटिबद्धता होती है, जिसने सही मायने में भारतीय विदेश-नीति को सालों-साल कमजोर बनाए रखा है। कांग्रेस के नेत्रत्व वाली यूपीए-1 सरकार के मुख्य-घटक दल डीएमके का बार-बार (सरकार गिराने की धमकी के साथ) ‘तमिल-मुद्दे’ पर श्रीलंका के लिए निर्धारित होने वाली विदेश-नीति को प्रभावित करना इसका उपयुक्त उदाहरण है।

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