6 प्रधानमंत्रियों ने सिर्फ वादा किया, 22 को PM मोदी निभाएंगे वादा

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गोरखपुर: खाद कारखाना भले ही दशकों से बंद रहा, लेकिन सुर्खियों में हमेशा बना रहा। चौकाने वाला पहलू ये कि कागजों में कारखाना कभी बंद ही नहीं हुआ। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गयी सूचना के मुताबिक कारखाना कभी बंद हुआ ही नहीं है। खैर आज यह हमारा विषय नहीं है।

कभी जिले की धड़कन होने वाले खाद कारखाने को चालू करने को लेकर स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सियासत भी खूब हुई । हर चुनाव में यह कारखाना मुद्दा बना। इस बीच अलग अलग पार्टियों से छह प्रधानमंत्री भी आये और चले गए , लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति न होने की वजह से कारखाने का साइरन नहीं बजवा सकें ।

इन पूर्व प्रधानमंत्रियों में विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर, नरसिंह राव, अटल बिहारी वाजपेयी, एचडी देवगौड़ा व मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल में इस खाद कारखाना को दोबारा चलाने का वादा किया । यहाँ तक कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली पिछली यूपीए सरकार ने खाद कारखाना को फिर चालू करने का भरोसा पैदा करते हुए कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिया था। जिसमे उसने गैस के लिए पाइप लाइन बिछाने की पहल की थी।

बीते लोकसभा चुनाव के दौरान फर्टिलाइजर से सटे मानबेला के मैदान पर अपने चुनावी भाषण में प्रधानमंत्री पद प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने खाद कारखाना को दोबारा शुरू कराने का जो वादा किया था, उसे पदभार ग्रहण करते ही कर दिखाया । अब 22 जुलाई को अपना वादा पूरा करने आ रहे है।

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खाद कारखाना एक नजर में

स्थापना :- 1 जनवरी 1969
उत्पाद :- स्वास्तिक छाप यूरिया पैदा होती थी, जिसकी गुणवत्तापूर्ण उर्वराशक्ति के कारण देश के हर हिस्से में जबरदस्त मांग थी।

किन्तु दुर्भाग्यवश यह खाद कारखाना 10 जून 1990 को एक दुर्घटना के बाद बंदहो गया ।1998 में संचालन को राजी कृभको से कर्मचारियों के समायोजन पर पेंच फंसने पर खाद कारखाना चलाने की स्कीम बैकफुट पर चली गई।तबसे लगातार सुर्खियों में रहे खाद कारखाना को फिर से चालू करने की पहल पिछली यूपीए सरकार ने अपने कार्यकाल के आखिरी महीनों में की। प्रक्रिया आरंभ होने के बाद नरेंद्र मोदी सरकार पर इसे चालू करने का भारी दबाव था।

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