अमेरिका और चीन को रौंद सकने वाले विमान पर भारत-रूस के बीच वार्ता शुरू

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अमेरिका और चीन को रौंद सकने वाले विमान पर भारत-रूस के बीच वार्ता शुरू

सुखोई टी-50 दुनिया का सबसे मारक लड़ाकू विमान होगा जिसका मुकाबला चीन और अमेरिका जैसी ताकतें भी नहीं कर सकेंगी।

पांचवी पीढ़ी का यह लड़ाकू विमान ज़मीन, हवा और समुद्र में सटीक हमला करने में पारंगत होगा।
सुखोई टी-50 लड़ाकू विमान के विकास में भारत के ऊपर कीमतों का बोझ कम करने के प्रस्ताव के बाद दोनों देशों ने बातचीत शुरू कर दी है। रूस की एक टीम भारत के साथ कीमतों पर अंतिम सहमति बनाने के लिए भारत आयी हुई है। पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के साझा विकास के लिए रूस ने भारत पर खर्चे के  बोझ को 5.5 अरब डॉलर से घटाकर 3.7 अरब डॉलर कर दिया है। इस राशि के जरिए दोनों देश तीन प्रोटोटाइप तैयार करेंगे। यह प्रोटोटाइप रूस में तैयार किए गए प्रोटोटाइप से अलग होगा।
भारतीय रक्षा मंत्रालय में पूर्व वित्त सलाहकार अमित कौशिश कहते हैं,

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प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के हस्तक्षेप के बाद एफ.जी.एफ.ए. पर बात आगे बढ़ी है। यह एक सकारात्मक कदम है लेकिन, रूस की तरफ से कीमतों का दिया गया प्रस्ताव स्वीकार्य होगा या नहीं इस पर कुछ कहना अभी मुश्किल है”

jetभारतीय रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर के संसद में दिए बयान के मुताबिक अनुसंधान एवं विकास अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के 94 महीने के भीतर भारतीय वायु सेना को विमान सौंपे जाने का काम शुरू हो जाएगा। हालांकि, भारत इससे पहले रूस में तैयार किए गए टी-50 विमान की खरीद सुखोई कंपनी से कर सकता है। रूस की वायु सेना को सुखोई टी-50 की आपुर्ति इसी साल से  शुरू कर दी जाएगी ।
कौशिश कहते हैं कि बातचीन नए सिरे से शुरू हुई है। पहले भारत ने रूस में तैयार टी-50 की सीधी खरीद की बात कही थी और कुछ विमानों का निर्माण भारत में करने का प्रस्ताव था। लेकिन, अब तस्वीर साफ नहीं है।

भारतीय रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर के संसद में दिए बयान के मुताबिक अनुसंधान एवं विकास अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के 94 महीने के भीतर भारतीय वायु सेना को विमान सौंपे जाने का काम शुरू हो जाएगा। हालांकि, भारत इससे पहले रूस में तैयार किए गए टी-50 विमान की खरीद सुखोई कंपनी से कर सकता है।

रूस की वायु सेना को सुखोई टी-50 की आपुर्ति इसी साल से  शुरू कर दी जाएगी ।

कौशिश कहते हैं कि बातचीन नए सिरे से शुरू हुई है। पहले भारत ने रूस में तैयार टी-50 की सीधी खरीद की बात कही थी और कुछ विमानों का निर्माण भारत में करने का प्रस्ताव था। लेकिन, अब तस्वीर साफ नहीं है।

कौशिश के मुताबिक,

भारत को टी-50 विमानों की जरूरत है। रूस से इस मामले में बात बढ़ चुकी थी। यह अच्छा संकेत है कि बातचीत दोबारा शुरू हो गयी है। बातचीत को अंतिम रूप देने में केवल भारत ही नहीं रूस की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यह देखना होगा कि भारत की जरूरतों को रूस किस हद तक पुरा कर पाता है।

जनवरी 2015 के बाद कीमतों और तकनीक के आदान-प्रदान को लेकर उपजे मतभेद के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत रुक गयी थी। प्रारंभिक चरण का डिजाइन जून 2013 में पुरा हो चुका है, जिस पर भारत ने 1483.15 करोड़ रुपए खर्च किए थे। दो पायलट इंजन वाले इस विमान के शोध एवं अनुसंधान तथा प्रोटोटाइप तैयार करने के लिए करीब 11 अरब डॉलर के खर्च की बात बतायी गयी थी। रक्षा बजट के  संकट के चलते भारत अपने हिस्से की   5.5 बिलियन डॉलर की रकम खर्च करने को राज़ी नहीं था। साथ ही, भारत का तर्क था कि रूस जब एकल इंजन के पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान का प्रोटोटाइप तैयार कर चुका है तो नए सिरे से इस पर खर्च करने का मतलब नहीं बनता है  क्योंकि साझा प्रोटोटाइप में मामूली फेरबदल ही किया जा रहा है।

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