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नवदुर्गा को समर्पित नवरात्र अत्यधिक शुभ होते हैं। नौ दिन मां को प्रसन्न के लिए हर श्रद्धालु प्रयास करता है। धर्म-कर्म में विश्वास न करने वाला व्यक्ति भी नवरात्र में सात्विक जीवन जीना चाहता है। नवरात्र के दिनों में पड़ने वाला मंगलवार अत्यधिक महत्व रखता है क्योंकि यह दिन वीर बंजरगी को समर्पित है। भगवती दुर्गा और हनुमान जी की पूजा मंगलवार के दिन सदियों से एक साथ होती आ रही है।

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भगवती पूजन से भक्तों को अद्भुत शक्ति और अलौकिक ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त होती है जो जितनी निष्ठा और श्रद्धा से, नियमित पूजन करते हैं, उतना ही लाभान्वित होते हैं। इन्हीं दिनों पूजन के साथ-साथ मंत्र साधना का भी विशेष महत्व है। प्रतिदिन मंत्र जाप और भगवती दुर्गा की स्तुति से सुखमय, वैभवमय उत्कर्षमय जीवन व्यतीत करते हैं। मूल सप्तश्लोकी दुर्गा, श्री दुर्गाष्टोत्तर शतनामस्तोत्रम् श्री दुर्गा द्वाङ्क्षत्रशन्नाम माला, सिद्धकुंजिकास्तोत्रम् आदि के पाठ से मनुष्य सब प्रकार के भय और पीड़ा से मुक्त हो जाता है।

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देवी दुर्गा के मंदिर में 21 केलों का भोग लगाएं और मंत्रों का जाप करें। मां भगवती दुर्गा की आराधना के लिए बीज मंत्र वांछनीय फलदायक है।

(ॐ) ह्वी क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥

(ॐ) जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवाद्यात्री स्वाहा स्वद्या नमोस्तुते॥
जयंती मंत्र सारे मंत्रों से कारगर बताया गया है।

बाधा शांति के लिए
सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।
एवमेव त्वया कार्य मस्मद्वैरि विनाशनम्॥

दारिद्रय से मुक्ति पाने के लिए-
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:
स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्रय दु:ख भय हारिणी का त्वदन्या
सर्वोपकारक रणाय सदाद्र्रचिता॥

रोगनाश के लिए-
रोगानशेषान पहांसि दुष्टा
रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान।
त्वामाश्रिमतानां न विपन्नराणं
त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥

अरोग्य व सौभाग्य के लिए-
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

मंगल कामना के लिए-
सर्व मंगल्य मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥

दयामयी भगवती दुर्गा जो भक्तों के लिए कल्पवृक्ष हैं। भगवती के 32 नामों की माला सब प्रकार की विपत्ति का विनाश करने वाली है-
नामावलिमिमां यस्तु दुर्गाया मम मानव:
पठेत् सर्वभयान्मुक्तो भविष्यति न संशय:॥

जो भक्त मां दुर्गा की इस नाम माला का पाठ करता है, वह नि:संदेह सब प्रकार के भय से मुक्त हो जाएगा। मनुष्य चाहे शत्रुओं से पीड़ित हो या दुर्भेद्य बंधन में पड़ा हो, छुटकारा पा जाता है। तीनों लोकों में इसके समान दूसरी कोई स्तुति नहीं है।

मंदिर से वापिस आते हुए 10 वर्ष से छोटी कन्या को धन, मिठाई अथवा कोई भी उपहार दें।

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