पंजाब में दलितों की रॉक स्टार है ‘डेंजर चमार’ गाना गाने वाली 17 साल की गिन्नी माही

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सोशल मीडिया पर इन दिनों एक नयी दलित रॉक स्टार गिन्नी माहि आजकल खूब छाई हुई हैं चलिए इसके बारे में जानते है

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आखिर कौन हैं गिन्नी माही?

पहले ये गाना सुनिए:

Source: Youtube

गिन्नी माही पंजाब के जालंधर जिले की हैं. इनकी उम्र 17 साल है. पंजाब के जाटव समुदाय से वास्ता रखती हैं गिन्नी. आज पंजाब में दलित पॉपस्टार बन चुकी हैं गिन्नी. हाल में ही इन्होंने एक गाना गाया है. गाने के बोल हैं:

“कुर्बानी देनों डरदे नही, रहंदे ने तैयार,

हैगे असल्हे तो वद्द डेंजर चमार.” 

इसका मतलब ये है कि कुर्बानी देने से डरते नहीं, अस्ले से भी हैं खतरनाक चमार. 

बता दें आपको कि इनका असली नाम गुरुकंवल भारती है. इनके यूट्यूब पर 1 लाख से ज़्यादा फॉलोअर्स हैं. फ़िलहाल गिन्नी माही अपने नये गाने पर गुरुनानक देव और सूफ़ी संत बुल्ले शाह के ऊपर काम कर रही हैं. इससे पहले वो गुरु रविदास और बाबा साहेब अंबेडकर के विचारों पर गीत बना चुकी हैं.

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इसके अलावा गिन्नी माही अपने गीतों में भ्रूण हत्या और पंजाब में बढ़ते नशे को लेकर भी गाने बना चुकी हैं. इसके साथ ही उनकी दो एल्बम “गुरां दी दीवानी”, “गुरपुरब है कांशी वालेयां दा” के साथ-साथ दो गाने “मैं फैन हां बाबा साब दी” और “डेंजर चमार” चर्चा का विषय रहे हैं.

ये है “Danger Chamar” गाना:

“मैं फैन हां बाबा साब दी, जिने लिखया सी संविधान” इस गाने के बोल से गिन्नी बाबा साहब अंबेडकर के बारे में बात कर रही हैं. भारत को संविधान उन्हीं की देन है. इंडियन एक्सप्रेस को दिए अपने इंटरव्यू में वो बताती हैं कि, “बाबा साहब दलित थे मात्र इसीलिए ही उन्होंने समानता और दलित हितों की बात नहीं की. वो दलित होने से पहले एक हिंदूस्तानी थे. इसी कारण उन्होंने हमें अधिकार दिए और सशक्त करने की ओर कदम बढ़ाया.” इन्होंने अपने नाम के पीछे “भारती” भारतीयता से जोड़कर ही लगाया है.

पंजाब में दलितों पर हालांकि गिन्नी माही ने ही नहीं इनसे पहले भी बहुतेरे कलाकारों ने गीत गाये हैं. मसलन जे, एच ताजपुरी, रूप लाल धीर, राज डबराल और चमकीला जैसे गायकों ने गाने गाये हैं.

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उन्होंने चमार का मतलब भी बताया. वो बताती हैं कि “च से चाम माने चमड़ी, म से मांस, और र से रक्त. हम सब चाम, मांस और रक्त से ही बने हैं.”

गिन्नी माही के पिता राकेश चंद्र माही कहते हैं कि, “हम राजनीतिक मंच से कभी कोई गाना नहीं गाते जैसा कि हमारे समुदाय के दूसरे लोग करते हैं.” गिन्नी कहती हैं कि, “राइटर्स की एक टीम बैठकर गानों पर काम करती है. चमार शब्द के इर्द-गिर्द बहुत से मसले हैं. मैं पहले किसी विषय पर सोच कर अपना आईडिया देती हूं. उसके बाद पांच-छह राइटर्स इन गानों को लिखने में जुट जाते हैं.”

नारी सशक्तिकरण का मुद्दा भी उठाती हैं

“की होया जे मैं धी हां”, जैसे गानों के जरिए गिन्नी नारी सशक्तिकरण और भ्रूणहत्या के खिलाफ़ अपनी आवाज़ उठाती हैं. आज के गायकों के बारे गिन्नी कहती हैं कि, “मुझे आज के गायकों में से वो बिलकुल पसंद नहीं हैं, जो लड़कियों को एक प्रोडक्ट की तरह पेश करते हैं. मुझे लगता है कि लड़कियों को आगे आकर अपनी बात रखनी चाहिए.” इसे पहले हरियाणा और पंजाब में जाट एवं जट समुदाय की दिलेरी और तथाकथित बहादुरी पर ही गाने बनते थे, लेकिन आज वर्तमान में गिन्नी के गाने लीक से हटकर एक ऐसे समुदाय की बात कर रहे हैं जिसकी आवाज़ कई समय से दबी हुई है.

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सात साल की उम्र से ही गाना गा रही हैं

गिन्नी सात साल की उम्र से ही गाना गा रही है, सीख रही हैं. जालंधर के कला जगत नारायण स्कूल से पढ़ाई के साथ-साथ संगीत की शिक्षा ली. कई जगहों पर मसलन जागरण में, डेरों पर गाने गाये. अमर स्टूडियो ने इनकी दोनों एल्बम को लॉन्च किया है. गिन्नी जालंधर के ही एचएमवी कॉलेज में संगीत की पढ़ाई कर रही हैं. अन्य लोगों की तरह इन्हें भी राहत फतेह अली खान, लता मंगेश्कर के साथ-साथ जस्टिन बीबर के गाने काफ़ी पसंद हैं.

बातचीत के अंत में जब वो कहती हैं कि, “कलाकार कोई जाट-वाट नहीं होता ये सब इंसान ने बनाया है.” गिन्नी के गानों में जो लहर है, वो भविष्य में सुधार करने की संभावना लिए जी रही है.

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