बदलेगी बिहार की सियासत, मोदी के साथ चलने को तैयार नीतीश कुमार!

18749

8 नवंबर की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश के नाम संबोधन ने एक हलचल पैदा कर दी. घरों में कालाधन रखने वालों के लिए यह किसी सर्जिकल स्ट्राइक से कम नहीं था. केंद्र सरकार के इस निर्णय से आतंकवाद और अलगाववाद की कमर टूटी है. साथ ही इससे देश की राजनीति में भी चहलकदमी दिखने लगी है.

आकर्षक ऑफर के लिए यहाँ क्लिक करें

पीएम मोदी के नोटबंदी के फैसले से देश में नए राजनीतिक समीकरण बनने के संकेत मिलने लगे हैं. वर्षों तक साथ रहे और फिर धुर विरोधी हुए नीतीश कुमार ने पहले सर्जिकल स्ट्राइक और फिर नोटबंदी का मुखर होकर समर्थन किया और सरकार को इसके लिए बधाई भी दी.

pm-modi-nitish-kumar-bihar

दीनदयाल उपाध्याय जन्मशती समारोह के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में बनी कमीटियों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जेडीयू नेता शरद यादव को शामिल किए जाने के बाद से ही बीजेपी और जदयू के साथ आने की चर्चा जोर पकड़ ली थी. नीतीश कुमार के मोदी सरकार की नीतियों और फैसलों के लगातार समर्थन के बाद इसे और बल मिल गया है.

सर्जिकल स्ट्राइक के बाद विपक्ष सबूत मांगने में लगा था और नीतीश ने की थी सरकार की प्रशंसा

नीतीश कुमार ने भारतीय सेना की ओर से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में किए सर्जिकल स्ट्राइक के समर्थन में ट्वीट करने से तो यही लगता है कि नीतीश और पीएम मोदी के बीच की दूरियां कुछ कम होती जा रही हैं. नीतीश ने इसके समर्थन में जो ट्वीट किया था उसमें पहले केंद्र सरकार की प्रशंसा की गई थी और फिर सेना को धन्यवाद दिया गया था.

सर्जिकल स्ट्राइक के बाद कांग्रेस और केजरीवाल ने तो सरकार से इसके सबूत तक मांगे थे. उस समय भी नीतीश कुमार ने सबसे पहले ट्वीट कर सरकार के निर्णय और सेना के जवानों की तारीफ की थी. वहीं राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने इस मामले में मोदी सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया था.

नोटबंदी पर खुलकर समर्थन में आए नीतीश कुमार

8 नवंबर को इधर देर रात पीएम मोदी ने 500 और 1000 के नोटों की बंदी की घोषणा की और उधर अगले ही दिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार के इस पहल की तारीफ कर दी. उन्होंने इस कदम के लिए पीएम मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली को बधाई भी दी.

nitish-kumar

नीतीश कुमार यहीं तक सीमित रहते तो इसका सियासी मतलब नहीं भी निकाला जा सकता था लेकिन जबसे उन्होंने दोबारा तारीफ करते हुए मधुबनी के वाटसन स्कूल में ‘निश्चय यात्रा’ के दौरान कहा कि हम 500-100 के नोट बंद करने के फैसले के हिमायती हैं, तब से कयासों का दौर शुरू हो गया है.

नीतीश कुमार के इस कदम ने बिहार की सियासत में कई संभावनों को जन्म देने का काम किया है. राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है कि दोस्त से दुश्मन बने नीतीश फिर से बीजेपी के साथ कंधा से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं.

15-1436957021-iftar-nitish-kumar.jpg

बिहार में जदयू-राजद-कांग्रेस ने मिलकर सरकार तो बना ली, लेकिन उनके नेता अक्सर विभिन्न मुद्दों पर आमने-सामने दिखे. चाहे वो शराबबंदी का मुद्दा हो या फिर राजद के बाहुबली नेता शहाबुद्दीन की जमानत का मामला हो, अक्सर तकरार देखने को मिली.

एनडीए में हो सकती है नीतीश कुमार की वापसी

अपनी साफ सुधरी छवि के लिए मशहूर नीतीश के इस दांव के बाद 10 साल के बाद बिहार की सत्ता में हाल ही में लौटे लालू के लिए आगे की राह फिर से मुश्किल दिखने लगी है. इस बात की चर्चा जोर पकड़ लिया है कि नीतीश कुमार का लगातार केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन, महागठबंधन में दरार आने का संकेत हैं.

source: news18

 

loading...