बलूचिस्तान से उठी आज़ादी की मांग अब जर्मनी जा पहुंची

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बलूचिस्तान से उठी आज़ादी की मांग अब जर्मनी जा पहुंची बर्लिन। बड़ी संख्या में बलूच कार्यकर्ताओं ने जर्मनी के शहर डुसेलडोर्फ, बर्लिन और म्यूनिख में ‘पाकिस्तान में बलूचिस्तान के लोगों के मानवाधिकार हनन और उन्हें लापता किए जाने’ के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधि ने यह जानकारी दी। बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने मंगलवार को ‘लापता किए गए पीड़ितों की याद में अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ के मौके पर ये प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लिए हुए थे जिन पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के मुद्दे को उठाने के लिए धन्यवाद दिया गया था।

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बलूचिस्तान के लोगों को वहां की सेना ने किया लापता 

बीएनएम के फैज मुहम्मद मर्ाी ने बुधवार को फोन पर कहा कि लापता कर दिए गए लोगों की याद में मंगलवार को मनाए गए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के मौके पर बलूचिस्तान में लोगों को पाकिस्तानी सेना द्वारा बलात् लापता किए जाने के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। बलूच प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लिए थे। उन पर लिखा था; ‘समर्थन के लिए नरेंद्र मोदी आपको धन्यवाद’, ‘संयुक्त राष्ट्र, सच्चाई का पता लगाने वाला दल बलूचिस्तान भेजे’, ‘बलूचों का नरसंहार बंद करो’, ‘पाकिस्तान-चीन आर्थिक गलियारे ने बलूचिस्तान में बर्बरता को और बढ़ाया।’

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मर्ाी ने आरोप लगाया कि 25 हजार से अधिक बलूच लोगों को सेना के हाथों लापता करा दिया गया है। लापता 3000 बलूच लोगों की हत्या कर दी गई। उनके शव बलूचिस्तान और सिंध के विभिन्न हिस्सों में पड़े मिले।  मर्ाी ने कहा कि वर्ष 2014 में खुजदार के तूतक इलाके में तीन सामूहिक कब्रें मिली थीं जिनमें से 169 शव बरामद हुए थे। उनमें से केवल दो की पहचान उनके कपड़ों और पहचान पत्र से हो पाई थी। पाकिस्तानी सेना ने भूकंप राहत अभियान के दौरान सितंबर और अक्टूबर 2013 में इन लोगों का अपहरण कर लिया था। इससे पहले रविवार की शाम लंदन स्थित चीन के दूतावास के बाहर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के खिलाफ प्रदर्शन हुआ था। तब ‘नो टू सीपीईसी’ जैसे नारे लगे थे।

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