अयोध्या में राममंदिर के ऊपर बनाई गई थी मस्जिद: डॉ. के.के. मोहम्मद (भारतीय पुरातत्ववेत्ता)

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पुस्तक के एक अध्याय में डॉ. मोहम्मद ने लिखा है, ‘जो कुछ भी मैंने जाना और कहा है, वह ऐतिहासिक सच है । हमे विवादित स्थल पर एक नहीं, बल्कि १४ स्तंभ मिले थे । सभी स्तंभों पर कलश खुदे थे । ये ११ वीं व १२ वीं शताब्दी के मंदिरों में पाए जानेवाले कलश के समान थे । कलश ऐसे नौ प्रतीकों में एक हैं, जो मंदिर में होते हैं । इस से कुछ मात्रा में यह भी स्पष्ट हो गया था कि, मस्जिद एक मंदिर के अवशेष पर खडी है । उन दिनों मैंने इस बारे में अंग्रेजी के कई समाचार पत्रों को लिखा था ।

उन्होंने यह भी बताया है कि, मेरे विचार को केवल एक समाचार पत्र ने प्रकाशित किया और वह भी ‘लेटर टू एडिटर कॉलम’ में ।’

देश के एक प्रमुख पोर्टल समाचार से बात करते हुए डॉ. मोहम्मद ने बताया कि, इस मुद्दे को लेकर इरफान हबीब (भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष) के नेतृत्व में कार्रवाई समिति की कई बैठकें हुईं थीं ।

उन्होंने कहा कि, ‘रोमिला थापर, बिपिन चंद्रा और एस गोपाल सहित इतिहासकारोने कट्टरपंथी मुसलमान समूहों के साथ मिलकर तर्क दिया था कि, १९ वीं शताब्दी से पहले मंदिर की तोडफोड और अयोध्या में बौद्ध जैन केंद्र होने का कोई संदर्भ नहीं है । इसका इतिहासकार इरफान हबीब, आरएस शर्मा, डीएन झा, सूरज बेन और अख्तर अली ने भी समर्थन किया था ।’ इनमें से कइयों ने सरकारी बैठकों में हिस्सा लिया और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का खुला समर्थन किया ।’

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