अयोध्या के राम मंदिर को ढहाने वाला क्रूर मुगल शासक बाबर नहीं बल्कि औरंगजेब था

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अयोध्या के राम मंदिर को ढहाने वाला क्रूर मुगल शासक बाबर नहीं बल्कि औरंगजेब था

भारतीय राजनीति का सबसे चहेता विषय राम जन्मभूमि है. यह एक ऐसा मुद्दा है, जिसपर प्रत्येक पार्टी अपनी राजनीतिक रोटी सेंकना चाहती है. हालांकि, इसे मुगलों द्वारा तोड़ दिया गया था, फ़िर भी देश की दक्षिणपंथी पार्टियां यहां फ़िर से मंदिर बनाना चाहती हैं. वामपंथी और अन्य सेक्यूलर पार्टियां इसे लोकतंत्र की हत्या बताती हैं. ख़ैर, ये सब तो आज़ादी से पहले चलते आया है और आगे भी ऐसे ही चलता रहेगा. मगर सबसे अहम सवाल यह है कि अयोध्या में राम मंदिर को तोड़ा किसने था?

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इतिहासकार और पुरातत्त्व विभाग का मानना है कि इसे बाबर ने तोड़ा था, मगर भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी (आईपीएस) किशोर कुणाल ने अपनी किताब ‘अयोध्या रीविजिटेड’ में दावा किया है कि इसे औरंगजेब के शासनकाल में तोड़ा गया था. इस किताब में कई और दावे किए गए हैं, जो हमारे लिए काफ़ी उपयोगी हो सकते हैं.

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किशोर कुणाल अपनी किताब के माध्यम से कहते हैं कि अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर को बाबर के सेनापति मीर बाकी ने नहीं ढहाया था, बल्कि इसे औरंगजेब के शासनकाल में ढहाया गया था. इस मुद्दे पर उन्होंने कई सबूत भी पेश किए.

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अयोध्या पर थॉमस हरबर्ट जैसे विदेशी यात्रियों और 1631 में जोन्स डि लिएट के वृत्तांतों को पेश किया है.

इतिहास में बताया गया है कि 1528 में राम मंदिर को ढहाया गया था, जबकि कुणाल कहते हैं कि इस मंदिर को औरंगजेब के शासनकाल में अवध के गवर्नर फेदाई खान ने 1660 में ढहाया था.

बाबर एक उदार मुगल शासक था

1990 के दशक में किशोर कुणाल केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत विशेष ड्यूटी पर तैनात थे. कुणाल ने कहा कि अयोध्या में किसी भी मंदिर को ढहाने और वहां किसी भी मस्जिद के निर्माण में बाबर की कोई भूमिका नहीं थी. बाबर को पिछले 200 वर्षो से उस कार्य के लिए बदनाम किया जा रहा है, जिससे उसका कोई ताल्लुक नहीं था. यह एक उदार मुगल शासक के प्रति अन्याय है.


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औरंगजेब ने ही मंदिर को ढहाया था

कुणाल ने अपनी किताब में लिखा है कि औरंगजेब ने राम मंदिर को ढहाया था. इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि बाबरी मस्जिद में तीन गुंबद थे जो औरंगजेब के शासनकाल के दौरान बने थे, लेकिन बुकानन ने इस मिथ्या शिलालेख से भ्रमित होकर बाबर को बदनाम किया.

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किसी ने सच ही कहा है कि इतिहास से सबक लिया जा सकता है, उसे दोहराने का मतलब, फ़िर से पागलपन करना है. भारतीय राजनीति के एक प्रमुख नेता ने कहा है कि देश में अगर राम मंदिर का निर्माण हो गया तो कई पार्टियों की रोटी बंद हो जाएगी.

 

source : gazab post

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