3000 वर्षों से पृथ्वी पर भटक रहा है यह इंसान! जीवित रहने का उद्देशय जानकर आप हैरत में पड़ जायेंगे

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भारत एक मात्र ऐसा देश है, जिसके इतिहास में इंसान के चिरंजीव होने की बात लिखी और उनके जीवित होने के प्रमाण भी मिलते हैं.

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इंसान के रूप में कई देवता और भगवान का जन्म भी हुआ है, जिनमे से कुछ इंसान  और देवता को  धर्म की रक्षा के लिए धरती पर ही रुकना पड़ा.

एक ऐसा ही इन्सान है जो लगभग 3000 वर्ष से धरती पर अलग अलग रूप धारण कर भटक रहा है.

3000 वर्षों से पृथ्वी पर भटक रहा है यह इंसान! जीवित रहने का उद्देशय जानकर आप हैरत में पड़ जायेंगे
3000 वर्षों से पृथ्वी पर भटक रहा है यह इंसान! जीवित रहने का उद्देशय जानकर आप हैरत में पड़ जायेंगे

तो आइये जानते है कौन है यह प्राणी और क्यों भटक रहा है.

  • यह इंसान लगभग 3000 वर्षों से अलग अलग रूप धारण कर अलग अलग जगहों पर भटक रहा है.
  • इस इंसान को कई लोगो ने देखने की बात कही है और यह एक बड़े धर्म युद्ध के लिए जिन्दा है कहा जाता है.
  • मान्यता अनुसार यह इंसान महाभारत काल से जीवित है और इसको चिरंजीव होने का वरदान नहीं बल्कि श्राप मिला है.
  • इस इंसान ने महाभारत युद्ध में अधर्म और छल  किया जिसके कारण उसको भगवान ने चिरंजीव बनाकर भटकते रहने की सजा दी.
  • ये है योद्धा अश्वत्थामा, जिसको उसकी गलती के कारण भगवान श्रीकृष्ण ने श्रापित कर उनके कलकी अवातर आने तक भटकते रहने का श्राप दे दिया था.
  • सनातन धर्म की किताब  भविष्य पुराण के अनुसार भविष्य में सनातन धर्म पर बहुत बड़ा  संकट आएगा. उस समय इंसान की सोच और चरित्र गिर चुका होगा. तब इंसान दुनिया से सनातन धर्म को मिटाने का प्रयास करेगा और उसी समय  कलयुग का अंत भी होगा. इस वक़्त भगवान विष्णु “कल्कि” अवतार के रूप में धरती पर जन्म लेंगे और उनकी सेना में अश्वत्थामा भी शामिल होकर अधर्म के विरुद्ध लड़ाई करेंगे.
  • योद्धा अश्वत्थामा धरती पर लगभग  5000 से 6000 वर्षों तक धर्म की रक्षा करते हुए ऐसे ही भटकते रहेंगे.

वास्तव में योद्धा अश्वत्थामा ने जो अधर्म किया था, उसकी सजा काटते हुए वह धर्म की रक्षा करते हुए, भगवान विष्णु के कलकी अवतार होने तक ऐसे ही भटकते रहेंगे.

योद्धा अश्वत्थामा के भटकने का उद्देश धर्म युद्ध की लड़ाई में शामिल होना और इस श्राप में मुक्त होकर मोक्ष की प्राप्ति करना है.

Source: Youngisthan

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