देश के बंटवारे के खिलाफ थे अंबेडकर, नहीं रोक सके पाकिस्तान बनने से..!

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देश के बंटवारे के खिलाफ थे अंबेडकर, नहीं रोक सके पाकिस्तान बनने से..! : आजादी के पूर्व तक बाबा साहेब आंबेडकर भले ही पूरी तरह से राजनीति में नहीं आए थे और समाज में दलितों के उत्‍थान के लिए लगातार काम रहे थे, लेकिन बावजूद इसके बाबा साहेब की तत्‍कालीन सियासत और वक्‍त दोनों पर पूरी नजर थी।

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देश के बंटवारे के खिलाफ थे अंबेडकर, नहीं रोक सके पाकिस्तान बनने से..!
देश के बंटवारे के खिलाफ थे अंबेडकर, नहीं रोक सके पाकिस्तान बनने से..!

वे लगातार भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस और उनके बड़े नेताओं महात्‍मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू की गलत और सही नीतियों की आलोचना कर रहे थे। यहां तक कि मुस्‍लिम लीग के मोहम्‍मद अली जिन्‍ना को भी उन्‍होंने नहीं बख्‍शा था। वैसे तो अंबेडकर की इन तीनों ही नेताओं से कई मुद्दों पर विरोध और असहमति थी, लेकिन सबसे बड़ा और अहम विरोध था भारत के विभाजन का।

दरअसल, अंबेडकर का भारत को देखने का बिल्‍कुल ही अलग नजरिया था। वे पूरे देश को अखंड देखना चाहते थे, इसिलए वे भारत के टुकड़े करने वालों की नीतियों के जबर्दस्‍त आलोचक रहे। भारत को दो टुकड़ों में बांटने की ब्रिटिश हुकूमत की साजिश और अंग्रेजों की हां में हां मिला रहे इन तीनों ही भारतीय नेताओं से वे इतने नाराज थे कि उन्‍होंने बाकायदा पाकिस्‍तान के विभाजन को लेकर एक पुस्‍तक थॉट्स ऑन पाकिस्तान’ लिखी जो बहुत ही चर्चा में आई।

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खास बात यह है कि विभाजन पर उनका विरोध विशेष रूप से जिन्‍ना से सबसे ज्‍यादा निशाने पर थे। अंबेडकर का मानना था कि देश को दो भागों में बांटना व्‍यवहारिक रूप से संभव नहीं है और ऐसे विभाजन से राष्‍ट्र से ज्‍यादा मनुष्‍यता का नुकसान होगा। बड़े पैमाने पर हिंसा होगी, जो यकीनन विभाजन के दौरान हुई। इसके अलावा उनका यह भी मानना था कि कांग्रेस मुस्‍लिम तुष्‍टीकरण की नीति अपनाते हुए ऐसा कदम उठा रही है। अपनी 1941 में आई पुस्‍तक थॉट्स ऑन पाकिस्‍तान में उन्‍होंने पूरी कांग्रेस और मुस्‍लिम लीग को ही कटघरे में खड़ा कर दिया।

यही नहीं अंबेडकर राष्‍ट्र के ‘जियो कल्‍चरल कंसेप्‍ट’ पर विश्‍वास करते थे। यानी की बाबा साहेब भारत को लेकर यह मानते थे कि भारत को प्रकृति ने ही एक एकल भौगौलिक ईकाई के रूप में बनाया है, लिहाजा उसे दो भागों में नहीं बांटा जाना चाहिए।

यकीनन राष्‍ट्र को लेकर अंबेडकर के विचार बेहद क्रांतिकारी तो थे ही, बल्‍कि वे पूर्ण और अखंड भारत की कल्‍पना करते थे। पाकिस्‍तान विभाजन को लेकर उनकी पुस्‍तक थॉट्स ऑन पाकिस्‍तान बेहद महत्‍वपूर्ण रही है।

देश के बंटवारे के खिलाफ थे अंबेडकर, नहीं रोक सके पाक बनने से

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