मोदी सरकार में ISRO ने देखे अच्छे दिन और नया सवेरा

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मोदी सरकार में ISRO ने देखे अच्छे दिन और नया सवेरा
मोदी सरकार में ISRO ने देखे अच्छे दिन और नया सवेरा

मोदी सरकार में ISRO ने देखे अच्छे दिन और नया सवेरा : पिछले दो सालों के दौरान भारतीय अंतरिक्ष के लिए नया सवेरा साबित हुए हैं। इस दौरान भारतीय अंतरिक्ष संगठन (इसरो) ने जहां मंगल तक पहुंचा, वहीं सफलतापूर्वक मिनी स्पेस शटल का प्रक्षेपण भी किया। इसरो ने बेहतरीन स्वदेशी उपग्रह आधारित दिशासूचक प्रणाली का विकास कर इतिहास रच दिया।

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इस वर्ष के अंत तक इसरो अनूठे दक्षिण एशियाई उपग्रह के प्रक्षेपण की तैयारी कर रहा है। यह दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के लिए एक दोस्ताना संचार उपग्रह है, जिसकी परिकल्पना खुद मोदी ने की। भारत की पहली अंतरिक्ष वेधशाला एस्ट्रोसैट की सफलता भी भारतीय वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। राजग सरकार के दो वर्षों में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में आमूल-चूल परिवर्तन देखने को मिला है।

पिछले दो वर्षों में मोदी के विशेष निर्देश पर भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने 28 अप्रैल को ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान की मदद से सातवें और अंतिम उपग्रह के प्रक्षेपण के साथ ही भारतीय दिशासूचक प्रणाली नाविक का काम पूरा कर विशेष उपलब्धि हासिल की।

एनडीए सरकार के पहले चरण में हुआ था स्वदेशी जीपीएस का सूत्रपात

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पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान के एक विचार को आगे बढ़ाया जब कारगिल विवाद के समय भारत को अच्छे स्तर के उपग्रह आधारित दिशासूचक प्रणाली के संकेत उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया गया था। एनडीए सरकार के पहले चरण में स्वदेशी जीपीएस की नींव पड़ी थी जिसे पीएम मोदी ने पूरा किया।

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