2015 में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में 900 सरकारी कर्मचारियों की नौकरी गई, 19 हजार को दूसरी सजाएं

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साल 2015 में सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के 900 कर्मचारियों को भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप में नौकरी से बर्खास्त किया गया। वहीं 19 हजार कर्मचारियों को निलंबन, वेतन में कटौती या चेतावनी जैसी दूसरी सजाएं दी गईं। केंद्रीय सतर्कता आयोग ने संसद में पेश अपनीसालाना रिपोर्ट में ये जानकारी दी है। बर्खास्त किए जाने वाले अधिकारियों में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) का भी एक अधिकारी था।

एक आयकर कमिश्नर की तनख्वाह में अस्थाई कटौती की गई। वहीं दिल्ली नगर महापालिका के एक पूर्व चीफ टाउन प्लानर की पेंशन की राशि सजा के तौर पर कम कर दी गई। केंद्रीय सतर्कता आयोग सभी सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की सभी संस्थाओं में होने वाले भ्रष्टाचार की निगरानी करता है। एक सतर्कता विभाग के एक अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि भ्रष्टाचार के मामलों को तय समय सीमा में हल करने की वजह से सजा की दर बढ़ी है।

रिपोर्ट के अनुसार सीवीसी के पास साल 2015 में कुल 32149 शिकायतें थीं। इसमें वो शिकायतें भी शामिल थीं जिनका पिछले साल फैसला नहीं हो सका था। सीवीसी ने बीते साल इनमें से 30789 शिकायतों को निपटारा किया। सीवीसी शिकायतों के जल्द निपटारने के लिए अत्याधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग करता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोक सभा चुनाव प्रचार के दौरान भ्रष्टाचार को अहम मुद्दा बनाया था। मोदी ने भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और विदेशों से कालाधन वापस लेने की भी बात कही थी।

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