22 जुलाई को उद्घाटन होते ही फिर लौटेगी खाद कारखाने की पुरानी रौनक

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Fertiliser-gorakhpur
source: final report

— दो दशक पूर्व तक गोरखपुर की पहचान हुआ करता था फर्टिलाइजर कार्पोरेशन आफ इंडिया का खाद कारखाना
— तब उर्वरक नगर का होना खुद में एक सम्मान की बात थी
— आज 400 आवासों में ज्यादातर भवन जर्जर हो गए हैं

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गोरखपुर: एफ सी आई यानि कि फर्टिलाइजर कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया, बोलचाल की भाषा में फत्तीलाइजर (खाद कारखाना) करीब 1100 एकड़ में विस्तृत सभी सुविधाओं से लैस यहां की भव्य टाउनशिप खुद में एक अलग गोरखपुर का अहसास कराती थी। नाम भी इसका उर्वरक नगर था।

ट्यूब लाइटों की दूधिया रोशनी ने जगमग परिसर, चमचमाती चौड़ी सड़कें, मन को भाने वाली हरियाली, हर तरह के खेल के लिए आउटडोर व इनडोर स्टेडियम, तरणताल, ओपेन एअर थिएटर, अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए 100 कमरों का भव्य हास्टल, गेस्टहाउस व इंटर तक स्कूल,कर्मचारियों व उनके बच्चों को शहर आने जाने के लिए आधा दर्जन लग्जरी बसें, 24 घंटे बिजली पानी, 1500 कर्मचारियों के लिए 1301 आवासीय इकाईयां।

कुल मिलाकर यहां पर जीवन की सभी जरूरी सुविधाएं मौजूद थीं। तब उर्वरक नगर का होना खुद में एक सम्मान की बात थी।

पर यह गुजरने जमाने की बात है। अब यह वर्षो से उजाड़ दिखता है। टूटी-फूटी सड़कें, बदरंग इमारतें, बिजली- पानी की समस्या, कारखाना परिसर तो खुद में जंगल नजर आता है। लगातार धुंआ उगलने वाली ऊंची-ऊंची चिमनियों में जंग लग चुकी है।

कुल मिलाकर कभी की बेहद जिवंत कालोनी की जिवंतता गायब हो गयी है। यह सब 10 जून 1990 की एक मामूली दुर्घटना के बाद हुआ। इसके बाद कारखाने पर अंतिम रूप से तालाबंदी कर दी गयी। कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देकर निकाल दिया गया। देश की हरित क्रांति में इस खाद कारखाने का प्रमुख योगदान था। यहां की स्वास्तिक छाप यूरिया पूरे देश में प्रसिद्ध थी।

कारखाने में प्रत्यक्ष रोजगार पाने वालों के अलावा यहां लगने वाले साप्ताहिक बाजार,अनुषांगिक इकाईयों में भी हजारों लोग रोजगार पाते थे। खेती-बारी के सीजन में खाद के लिए हाहाकार नहीं मचता था। अब यहां वीरानी छाई है। तबके बने भवन जर्जर हो गए हैं। मुख्य सड़क तो ठीक है लेकिन कालोनी की
ज्यादातर सड़कें बदहाल हैं।

400 आवासों में पूर्व कर्मचारी रहते हैं, शेष एसएसबी के कब्जे में है। ज्यादातर भवन जर्जर हो गए हैं। यहां तक कि बाजार व स्कूलों की रौनक भी गायब हो गई। फिलहाल खाद कारखाने को पुन: चालू कराने की केंद्र सरकार की पहल से लोगों में उम्मीद जगी है कि पुरानी रौनक फिर लौट आएगी।

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