तीसरे विश्व युद्ध का संकेत दे रहे पुतिन के फैसले !

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नई दिल्ली। सीरिया में छिड़ी जंग पर रूस और अमेरिका के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। रूस ने नए ठिकानों पर अपनी खतरनाक मिसाइलों की तैनाती शुरू कर दी है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के कई फैसले और उसकी सैनिक तैयारियां भयावह खतरे का संकेत दे रही हैं।

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पुतिन बहुत ज्यादा आक्रामक हैं। कल रूस ने अचानक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया। इससे दुनिया सकते में है। रूस ने जापान के उत्तर में तैनात अपनी सबमरीन से परमाणु बम ढोने की क्षमता वाले रॉकेट का परीक्षण किया। रूस की मीडिया का दावा है कि उत्तर-पश्चिम के एक घरेलू अड्डे से भी मिसाइल छोड़ी गई।

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इन खबरों से दुनिया भर में खलबली मच गई। पूरी दुनिया की नजर रूस की सैनिक हलचलों पर आकर ठहर गई। रूस का आक्रामक कदम यहीं नहीं थमा। रूस ने पोलैंड और लिथुवानिया के साथ लगी सीमा पर भी परमाणु क्षमता वाली मिसाइलें तैनात कर दीं। रूस के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय समझौतों को तोड़ने वाला बताया जा रहा है।

सीरिया संकट के बाद बदले हालात में पुतिन अब समझौते के मूड में नहीं हैं। रूस के दो जंगी जहाज भूमध्य सागर में लौट रहे हैं। इस बीच अमेरिका की शह पर पश्चिमी देशों के एक गुट ने सीरिया में रूस की भूमिका की आलोचना तेज कर दी है, लेकिन इससे राष्ट्रपति पुतिन की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा।

अमेरिका के मित्र देशों के इस रुख से पुतिन और भड़क गए हैं। उनके तेवर का पता इस बात से भी चलता है कि उन्होंने रूस के बड़े अधिकारियों, नेताओं और उनके नाते-रिश्तेदारों को फौरन वतन लौटने का हुक्म दिया। इसकी अनदेखी करने वालों को अंजाम भुगतने की चेतावनी दी।

पुतिन के इस फैसले के बाद रूस की मीडिया में तीसरे विश्व युद्ध की अटकलें और तेज हो गई हैं। रूस के पूर्व राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचोव ने भी हालात पर चिंता जताई है। गोर्बाचोव रूस और अमेरिका के बीच लगातार बढ़ते तनाव से परेशान दिखे। उन्होंने इसे दुनिया के लिए खतरनाक मोड़ करार दिया। गोर्बाचोव जैसे अनुभवी नेता अगर इस तनाव को दुनिया के लिए खतरे के रूप में देख रहे हैं तो इसकी वजह है। असल में बीते करीब पांच साल से सीरिया में गृहयुद्ध जैसे हालात हैं। सीरिया की अल असद सरकार को रूस का समर्थन हासिल है तो अमेरिका असद विरोधियों के साथ खड़ा है। रूस एलेप्पो में असद सरकार की मदद के लिए भारी बमबारी कर रहा है।

बीते महीने संघर्ष विराम खत्म होने के बाद से ये लगातार जारी है। इस बीच पुतिन ने पहले से तय फ्रांस दौरे को अचानक टाल कर और खलबली मचा दी। व्लादिमीर पुतिन को 19 अक्‍टूबर को पेरिस आना था। पुतिन की फ्रांस के राष्ट्रपति ओलांद से सीरिया के बारे में बात होनी थी। लेकिन इस मुलाकात के लिए नई तारीख का ऐलान होने से पहले ही इसे रद्द कर दिया। फ्रांस सरकार ने बयान में कहा है कि राष्‍ट्रपति ओलांद ने पुतिन के साथ बातचीत की पेशकश की थी। ये बातचीत सिर्फ सीरिया के मुद्दे पर होनी थी। यह पता चलते ही रूस के राष्‍ट्रपति ने पेरिस यात्रा को स्‍थगित कर दिया।

तीसरे विश्व युद्ध का संकेत दे रहे पुतिन के फैसले !

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