कश्मीरी अलगाववादियों पर सरकार खर्च करती थी 100 करोड़, लेकिन अब मोदी सरकार ने ख़त्म की यह मौज

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सरकार ने अलगाववादी नेताओं के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने का फैसला किया है। अब न केवल इन नेताओं की सुख-सुविधाओं पर अब तक किए जा रहे सरकारी खर्च पर लगाम लगाई जाएगी, बल्कि उनके पासपोर्ट भी निरस्त किए जा सकते हैं।

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गृहमंत्रालय के सूत्रों के अनुसार राज्य और केंद्र सरकार हुर्रियत नेताओं की यात्रा, होटल और सुरक्षा पर सालाना 100 करोड़ रुपए सालाना से अधिक खर्च करती है।

सरकार के पैसों पर ही ही अलगाववादी फाइव स्टार होटलों में ठहरते हैं और सरकारी गाड़ियों में घूमते हैं। वहीं, साल भर इन नेताओं की सुरक्षा में लगभग एक हजार सरकारी सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं।

2010 से 2015 तक कश्मीर में अलगाववादियों के घर की सुरक्षा के लिए 18 हज़ार पुलिसकर्मियों तैनात किए गए थे।  इस तैनाती पर राज्य सरकार ने सुरक्षाकर्मियों की सैलरी पर 309 करोड़ रुपए खर्च किए।

इन सुरक्षाकर्मियों की सैलरी पर राज्य सरकार ने 309 करोड़ रुपए खर्च किए। इसके अलावा अलगाववादियों के पीएसओ पर 150 करोड़ रुपए खर्च किए गए। सूत्रों के अनुसार बीते छह सालों में अलगाववादियों पर केंद्र और राज्य सरकार ने करीबन 700 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

इन अलगाववादियों के देश-विदेश में होने वाले इलाज का खर्च भी सरकार ही उठाती है।

हाल ही में राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे और हुर्रियत के रवैये के बारे में जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हरी झंडी के बाद गृह मंत्रालय अलगाववादियों के खिलाफ कार्रवाई में जुट गया है।

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