देशवासियों को वैदिक शिक्षा उपलब्ध करवाएंगे स्वामी रामदेव, बनाई ये बड़ी योजना..!

नई दिल्ली। बाबा रामदेव योग, आयुर्वेद और घरेलू उपयोग के सामान के बाद अब शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर तैयारी कर रहे हैं। देश भर में वैदिक और आधुनिक शिक्षा के तालमेल वाले नौ विशेष स्कूलों की आधारशिला रखने के बाद अब ये देश की हर तहसील में इन्हें खोलने की योजना में जुटे हैं। केंद्र सरकार से अलग से एक विशेष वैदिक शिक्षा बोर्ड को मंजूरी मिलने तक वे इन स्कूलों को सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत ही चलाएंगे।

बाबा रामदेव के प्रवक्ता एस. तिजारावाल ने बताया कि पहले चरण में देश के पांच सौ जिला मुख्यालयों में एक-एक आचार्यकुलम खोले जाएंगे। इसके अगले चरण में सभी तहसील मुख्यालयों में भी ऐसे ही स्कूल खोले जाएंगे। पहला स्कूल वर्ष 2013 में हरिद्वार में शुरू किया गया था। इसके बाद अब तक नौ जगहों पर स्कूल शुरू हो चुके हैैं या उनका शिलान्यास हो चुका है। इनमें हरियाणा के दो स्कूलों के अलावा मुंबई, पुणे, बेंगलूरू, हैदाबाद और जयपुर भी शामिल हैं। ये कहते हैैं कि इन आचार्यकुलम स्कूलों में नई पीढ़ी को आधुनिक तकनीक और शिक्षा से तो लैस किया ही जा रहा है, लेकिन पुरातन ज्ञान को भी उतना ही महत्व दिया जा रहा है। कोशिश यह की गई है कि वे वैदिक ज्ञान, भारतीय संस्कृति, परंपरा और मूल्यों से इस तरह लैस हों कि दुनिया के किसी भी कोने में नेतृत्व कर सकें।

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तिजारावाला बताते हैैं कि छठी से शुरू होने वाले इन स्कूलों में अभी शुरुआती कक्षाओं में जहां वैदिक शिक्षा पर ज्यादा जोर होता है, आगे की कक्षाओं में सीबीएसई के पाठ्यक्रम पर ज्यादा जोर होता है। क्योंकि इनकी परीक्षा सीबीएसई के तहत ही होती है। अगर केंद्र सरकार बाबा रामदेव की ओर से प्रस्तावित वैदिक शिक्षा बोर्ड को मंजूरी दे देती है तो नया पाठ्यक्रम लागू किया जा सकेगा। साथ ही इस पाठ्यक्रम के तहत वैदिक शिक्षा के अन्य स्कूल भी खोले जा सकेंगे। अभी भी आचार्यकुलम स्कूलों में छात्रों को सुबह पांच बजे से ही बेहद संयत दिनचर्या का पालन करना होता है। इसमें अध्ययन के अलावा यज्ञ, संध्या वंदन, स्वाध्याय और योग आदि शामिल हैं।

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