सरदारों पर 12 बजे वाले जोक पर हंसने से पहले ज़रा इसके पीछे की कहानी जान लीजिये

सरदारों पर 12 बजे वाले जोक पर हंसने से पहले ज़रा इसके पीछे की कहानी जान लीजिये

हम सभी अकसर सरदारों के चुटकुलों पर हंसे हैं, ख़ास तौर पर 12 बजे वाला जोक तो अकसर सुनाया जाता है. पर क्या कभी आपने जानने की कोशिश की है कि आखिर इसके पीछे कहानी क्या है? अगर आप जानते होते तो शायद फिर कभी किसी सरदार का 12 बजने को लेकर मज़ाक न उड़ाते.आज हम आपको बताने जा रहे हैं सबसे प्रचलित जोक के पीछे की असली कहानी.

Source: Ytming

बात तब की है जब नादिर शाह भारत आये. 17वी शताब्दी में हज़ारों हिन्दू और मुसलामानों का क़त्ल कर नादिर के सैनिकों ने उनकी औरतों को बंधी बना लिया था. दिल्ली को लूट कर जब वो पंजाब पहुंचे, तब सिक्खों नें उनके शिविर पर हमला कर के औरतों को आज़ाद कराने की योजना बनायी. नादिर के सैनिकों की विशाल संख्या को देखते हुए उन्होंने सामने से हमला न कर के आधी रात को उनपर हमला किया. तभी से कहा जाने लगा कि 12 बजे सरदारों को कुछ हो जाता है.

कोई और जाने न जाने सरदार ज़रूर इस कहानी से परिचित होते हैं, फिर भी आपने शायद ही कभी किसी सरदार को इस बात पर भड़कते हुए देखा होगा. वो फिर भी जिंदादिली से इन चुटकुलों पर हंस लेते हैं.

जबकि सच ये है कि अगर उस रात 12 बजे सरदारों ने ये काम न किया होता जिसे लेकर आज तक उनका मज़ाक उड़ाया जाता है तो, हज़ारों हिन्दू और मुस्लिम औरतों की आबरू न बच पाती. असल में वो मज़ाक के पात्र नहीं हैं, बल्कि सम्मान के हक़दार हैं.


Source: Mensxp

अब जब आप सच जान ही चुके हैं,तो अगली बार ऐसा मज़ाक करने से पहले या 12 बजे वाले चुटकुले पर हसने से पहले ज़रा इस कहानी को याद कर लेना.

इस पोस्ट को Like और Share कर के ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को बताएं कि 12 बजे वाले जोक के पीछे कहानी क्या है, ताकि फिर कभी इस नेक काम को लेकर किसी सरदार का मज़ाक न उड़ाया जाये.

loading...

Facebook Comments

You may also like

तो क्या ममता बनर्जी हिन्दू नहीं, मुस्लिम है ?

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री और तृणमूल