जानिए मनीष सिसोदिया की फिनलैंड यात्रा की असली कहानी!

जानिए मनीष सिसोदिया की फिनलैंड यात्रा की असली कहानी : एक तरफ दिल्ली में डेंगू और चिकनगुनिया का कहर टूटा हुआ है, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मेडिकल टूरिज्म पर बैंगलोर में हैं तो आखिर दिल्ली के डिप्टी सीएम फिनलैंड में कौन सा जरूरी काम कर रहे हैं? हर किसी के दिमाग में यह सवाल उठ रहा है। दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार औपचारिक तौर पर कह रही है कि मनीष सिसोदिया स्किल डेवलपमेंट के बारे में किसी कॉन्फ्रेंस के सिलसिले में फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी गए हैं। हमारी जानकारी के मुताबिक असल एजेंडा कुछ और ही है।

हेलसिंकी में हमारे एक सूत्र ने बताया कि वहां के एक बड़े गुरुद्वारे में मनीष सिसोदिया की मुलाकात खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों से होनी है। इसी वजह से उनकी यात्रा को टॉप सीक्रेट रखा गया था, लेकिन डेंगू और चिकनगुनिया पर हंगामे के बीच बात खुल गई। हर छोटी-मोटी बात पर ट्वीट करने वाले मनीष सिसोदिया ने फिनलैंड से अपनी एक भी तस्वीर अभी तक ट्वीट नहीं की है, उस सेमिनार की भी नहीं, जिसमें उनके जाने का दावा किया जा रहा है। वैसे भी मनीष सिसोदिया अंग्रेजी बोलने और समझने में कच्चे हैं। ऐसे में उनके ऐसे किसी सेमिनार में जाने का कोई मतलब नहीं है।

 जानिए मनीष सिसोदिया की फिनलैंड यात्रा की असली कहानी
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खालिस्तान समर्थकों के साथ आप की साठगांठ!

हमारे सूत्र ने बताया कि जिस सेमिनार के नाम पर मनीष सिसोदिया वहां गए हैं, वो सिर्फ एक दिन का है। इसके बाद 4 दिन सैर-सपाटे के लिए रखे गए हैं। इसके बाद भी सिसोदिया कुल 4 दिन तक फिनलैंड में ही रहेंगे। वहां पर उनके रहने का बंदोबस्त भी खालिस्तान समर्थकों ने ही किया है। इस दौरान पूरे यूरोप के खालिस्तान समर्थक नेताओं की बारी-बारी सिसोदिया से मुलाकात तय है। यही कारण है कि विवाद के बाद भी वो यात्रा बीच में छोड़कर आने को तैयार नहीं हुए। जो बात सबसे अहम है वो यह कि इन बैठकों में चंदे की रकम भेजने के तरीके पर बात होगी। इस काम के लिए केजरीवाल सिसोदिया के अलावा किसी दूसरे पर भरोसा नहीं करते हैं। जिस गुरुद्वारे में सिसोदिया की बैठकें होनी हैं वो खालिस्तान समर्थकों का अड्डा माना जाता है। यहां जगह-जगह आतंकवादी भिंडरावाले की तस्वीरें लगी देखी जा सकती हैं।

पंजाब चुनाव के सिलसिले में है अहम मुलाकात

दरअसल पंजाब में अगले साल होने वाले चुनाव में इस बार खालिस्तान समर्थक काफी दिलचस्पी ले रहे हैं। आम आदमी पार्टी के सहारे वो राज्य की राजनीति में पर्दे के पीछे से पकड़ बनाने की कोशिश में हैं। पंजाब में चुनाव लड़ने के लिए आम आदमी पार्टी को पैसों की जरूरत है, जो कि ये खालिस्तान समर्थक संगठन पूरा कर रहे हैं। यूरोप और दूसरे देशों में कारोबार कर रहे सिख समुदाय के पास पैसे की कोई कमी नहीं है। इनमें से कई लोगों के पास अच्छी खासी मात्रा में ब्लैकमनी भी है। यही ब्लैकमनी चंदे की शक्ल में आम आदमी पार्टी तक पहुंचाने की बात हो रही है। बदले में इन खालिस्तानी संगठनों की मांग है कि उनकी पसंद के उम्मीदवार उतारे जाएं। कई खालिस्तानी नेताओं ने बाकायदा कैंडिडेट ‘स्पॉन्सर’ करने की इच्छा भी जताई है। जानिए मनीष सिसोदिया की फिनलैंड यात्रा की असली कहानी

विदेश में पूरी मौज, लेकिन कागज पर खर्च कम

मनीष सिसोदिया जब 9 दिन फिनलैंड में रहकर वापस लौटेंगे तो वो अपना खर्च बहुत ज्यादा नहीं दिखाएंगे। जबकि उनका आने-जाने का टिकट बिजनेस क्लास का है और फिनलैंड में वो एक लग्जरी होटल में ठहरे हुए हैं। वहां पर उन्हें खालिस्तानी अलगाववादियों की तरफ से कड़ी सुरक्षा भी दी गई है। बाकी हर तरह के ऐशो-आराम का बंदोबस्त भी खालिस्तान समर्थक धन्नासेठों ने किया है। इसी साल मार्च में भी मनीष सिसोदिया इसी तरह के काम के लिए लंदन गए थे। लौटकर उन्होंने सिर्फ 4 लाख का खर्च दिखाया। जबकि इतना तो उनका फ्लाइट और होटल का किराया ही रहा होगा।

खालिस्तान समर्थकों का साथ लेने की जरूरत क्यों?

आम आदमी पार्टी के एक सूत्र ने हमें बताया कि पंजाब चुनाव को केजरीवाल ने अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। उन्हें अच्छी तरह से एहसास है कि अकाली दल और कांग्रेस की जमीनी ताकत का मुकाबला करना आसान नहीं है। केजरीवाल को लग रहा है कि एक बार पंजाब हाथ में आ गया तो बाकी राज्यों में चुनाव लड़ने के लिए पैसे की कोई कमी नहीं होगी। उधर अलग खालिस्तान का सपना देख रहे लोगों को भी आम आदमी पार्टी पर दांव खेलना सुरक्षित लग रहा है। लोकसभा चुनाव में AAP की कामयाबी से यह उम्मीद बढ़ गई है। खालिस्तान समर्थक संगठनों को लग रहा है कि अगर उनके प्रायोजित कुछ लोग विधानसभा में पहुंच गए तो अलग खालिस्तान के एजेंडे पर काम करना ज्यादा आसान हो जाएगा।

रोम यात्रा में केजरीवाल भी खालिस्तानियों से मिले!

मदर टेरेसा को संत घोषित किए जाने के मौके पर रोम गए अरविंद केजरीवाल ने वहां के एक बड़े गुरुद्वारे में जाकर कट्टरपंथी सिख नेताओं से मोबाइल कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की थी। यूं तो वो बातचीत काफी लंबी और अकेले में थी। लेकिन उसका एक छोटा सा वीडियो अपने साथ गए सत्येंद्र जैन से रिकॉर्ड करवाकर केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर जारी किया था। ये वीडियो यह दिखाने के लिए था कि उन्हें विदेशों में बसे पंजाबियों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। नीचे लिंक पर क्लिक करके यह वीडियो आप देख सकते हैं।

आम आदमी पार्टी पर पहले भी लगते रहे हैं आरोप

पटियाला से पार्टी के ही सांसद धर्मवीर गांधी ने कुछ समय पहले खुलकर यह आरोप लगाया था कि केजरीवाल पंजाब जीतने के लिए बेहद खतरनाक खेल खेल रहे हैं। उन्होंने खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों से यह कहकर समर्थन लिया है कि उनकी सरकार बनी तो वो जेलों में बंद खालिस्तानी नेताओं को रिहा कर देंगे। धर्मवीर गांधी ने कहा था कि अगर ऐसी कोई चूक हुई तो पंजाब में एक बार फिर से आतंकवाद की वापसी हो सकती है। इतना ही नहीं कुछ साल पहले आम आदमी पार्टी के विधायक जरनैल सिंह लंदन में खालिस्तान के समर्थन में हुई एक रैली में शामिल होने गए थे। वहां पर उन्होंने खालिस्तान की आजादी के नारे भी लगाए थे। बताया जाता है कि पंजाब के लिए खालिस्तान समर्थकों और केजरीवाल के बीच डील कराने में जनरैल सिंह का बड़ा रोल रहा है।

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लंदन में हुई इस रैली में आम आदमी पार्टी विधायक जरनैल सिंह ने अलग खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाए थे। यह तस्वीर भगत सिंह क्रांति सेना के तेजिंदर बग्गा ने ट्वीट की थी। जानिए मनीष सिसोदिया की फिनलैंड यात्रा की असली कहानी

इतना ही नहीं, पंजाब में चुनाव प्रचार कर रहे आम आदमी पार्टी के कुछ उम्मीदवारों ने खुल्लमखुल्ला आतंकवादी भिंडरावाले की तस्वीर अपने पोस्टरों में छापी है। इनमें अरविंद केजरीवाल की तस्वीर भी भिंडरावाले के साथ में है। आम आदमी पार्टी ने ऐसी प्रचार सामग्री पर चुप्पी साध रखी है।

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(यह रिपोर्ट फिनलैंड में मौजूद हमारे सूत्र के भेजे इनपुट्स के आधार पर लिखी गई है। अगर आम आदमी पार्टी या मनीष सिसोदिया की तरफ से इसमें किए गए दावों का कोई खंडन आता है तो हम उसे भी प्रमुखता से पब्लिश करेंगे।)

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Article Source : Newsloose

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