जानिए 8 सालों की दिल दहला देने वाली साध्वी प्रज्ञा की दर्दनाक कहानी

१. साध्वी प्रज्ञासिंह ठाकुर को बंदी बनाने से १३ दिन पूर्व आतंकवादविरोधी पथक (एटीएस) के अधिकारियों ने उन्हें बंद कर रखा।

२. साध्वी की पवित्रता के विषय में गंदी भाषा प्रयुक्त की गई। आतंकवादविरोधी पथकद्वारा उन्हें अश्लील चित्रफीत (वीडियो) दिखाने समान घृणास्पद प्रकार किए गए।

३. पुलिसद्वारा कमरपट्टे से साध्वी को बेहोश होने तक पीटा गया। वे अनेक बार मूर्छित हुर्इं।

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साध्वी प्रज्ञा की दर्दनाक कहानी

४. उन्हें इस प्रकार प्रताडित किया कि, उनको आत्महत्या ही करना प्रतीत हो रहा था।

५. अधिकारी खानविलकर एवं उनके गुट ने साध्वी को दिनरात भीषण मारपीट की।

६. साध्वी को उनके शिष्य भीमभाई को मारने पर विवश किया गया।

७. पुलिस ने साध्वी के अधिवक्ता एवं सगेसंबंधी आदि किसी से भी उनका संपर्क नहीं होने दिया।

८. छलसत्र के कारण साध्वी प्रचंड मानसिक तनाव में थीं। वे अन्नजल ग्रहण करने में भी असमर्थ थीं। उन्हें मूत्राशय का कष्ट हो रहा था। इसके साथ वे कर्करोग से भी ग्रसित थीं।

९. प्रसारमाध्यमों ने साध्वी प्रज्ञासिंह को हिन्दू आतंकवादी सिद्ध किया; परंतु वे अनेक दिन तक चिकित्सालय में होने का समाचार एक भी समाचारवाहिनी ने जनता तक नहीं पहुंचाया।

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साध्वी प्रज्ञा की दर्दनाक कहानी

१०. उनकी मुर्छितअवस्था में कोठरी में मनःस्थिति ठीक न रहते में कुछ कागजातों पर उनके हस्ताक्षर भी लिए गए।

११. साध्वी के गुरू को अपशब्द कह कर उन्हें अपमानित किया।

१२. साध्वी के निर्दोष मुक्त होने के भय से कांग्रेस के कार्यकाल में एन.आइ.ए. ने २००८ प्रकरण में पूरक आरोपपत्र प्रविष्ट करने में टालमटोल की।

साभार : दैनिक सनातन प्रभात

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