मोदी सरकार में कश्मीर में पत्थरबाजों के आये बुरे दिन

आजकल कश्मीर में पत्थरबाजों की शामत आई हुई है. जो पत्थरबाज सड़कों पर हर घर से मुजाहिद निकलने की बात कहते थे वे अब खुद ही घरों में दुबके हुए हैं. आलम यह है कि ये लोग रात को अपने घरों में भी नहीं सो रहे हैं. कश्मीर में पत्थरबाजों का दिन का चैन और रात की नींद उड़ी हुई हैं.

दरअसल, घाटी में सेना ने सुरक्षा बलों और जम्मू कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर सर्च आॅपरेशन चलाया हुआ है. जो लोग आतंकवादियों और अलगावादियों के इशारे पर घाटी में भारत विरोधी नारे लगाते थे और सुरक्षा बलों पर पत्थरों से हमला करते थे उन लोगों की प्रदर्शन के दौरान की वीडियों रिकार्डिंग सुरक्षा बलों के पास है. वीडियों रिकार्डिंग से उनके फोटों निकालकर रात के समय सुरक्षा बल राज्य पुलिस की मदद से घर घर जाकर उनके चेहरों का मिलान करते हैं और जो पकड़ में आ जाता है तो समझों उसकी फिर शामत आ जाती है.

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कश्मीर में पत्थरबाजों की पहचान के लिए खुफिया तंत्र और वोटर आईडी का भी सहारा लिया जा रहा है. कश्मीर में पत्थरबाजों ने सपने में भी इसकी कल्पना नहीं की थी कि सरकार उनको घरों खोज निकालेगी. जो लोग सुरक्षा बलों के सामने सीना फुलाकर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाकर उन्हें चैलेंज करते थे अब वे दिन के उजाले भी सामने आने से घबरा रहे हैं. बताया जाता है कि पुलिस की कार्रवाई से डर कर ये लोग काम के बहाने कश्मीर घाटी छोड़कर देश के अन्य शहरों में भी चले गए हैं.

तो वहीं कुछ पत्थरबाजों को पुलिस द्वारा पकडे जाने के डर से उनके परिजनों ने उन्हें अपने रिस्तेदारों के यहां भेज दिया है.

जब पुलिस उनके परिजनों से पूछती हैं तो वे बताते हैं कि घाटी के अलगाववादी उनके बच्चों पर पत्थरबाजी के लिए दवाब डालते हैं. इस डर से उन्होंने बच्चों को यहां से अलग कर दिया है.

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सुरक्षा बलों के इस अभियान में करीब 1 हजार से अधिक लोगों को पुलिस ने डिटेन किया है. जबकि कई सौ को जेल में डाल दिया है. गौरतलब हो कि जब सेना और सुरक्षा बल आतंकियों से मुठभेड़ करते थे तो उस दौरान ये लोग आतंकियों को बचाने के लिए सेना पर पथराव शुरू कर देते थे. जिस दिन से भारतीय सेना ने एलओसी के पार जाकर आतंकी अड्डों को तबाह किया है, उसके बाद से तो कश्मीर में पत्थरबाजों को सांप सूंघ गया है. अब ये ऐसे शरीफ बच्चे बन गए है, जैसे इन्होंने जीवन में कभी पत्थर देखा ही न हो.

दरअसल, सर्जिकल स्ट्राइक के बाद घाटी के अलगाववादियों को अब लगने लगा है कि केंद्र सरकार जिस प्रकार से सेना को खुली छूट दे रही है उसमें यदि इन्होंने बाधा खड़ी करने की कोशिश की तो उसका अंजाम इस बार बुरा हो सकता है.

क्योंकि भारत की कार्रवाई को जिस प्रकार दुनिया के बाकी देशों ने अपना समर्थन दिया है उससे इन अलगाववादियों के हौंसले पस्त हैं.

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