इस नए कानून से ख़त्म हो जाएगी महाराष्ट्र में सूखे की समस्या

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भयानक जल संकट से निपटने के लिए महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री सुभाष देसाई ने कहा कि उन्होंने महाराष्ट्र उद्योग विकास निगम (एमआईडीसी) से जुड़े विभागों को निर्देश दिया है कि वे जल संभरण प्रबंधन योजना के तहत अपने क्षेत्राधिकार में बांधों की ऊंचाई बढ़ाने और झीलों को गहरा बनाने के संबंध में व्यवहार्यता अध्ययन करें।
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इस नए कानून से ख़त्म हो जाएगी महाराष्ट्र में सूखे की समस्या

देसाई ने कहा, ‘हम एमआईडीसी के बांधों की ऊंचाई बढ़ाने और एमआईडीसी अधिनियम 1961 में संशोधन कर उद्योगों के लिए पुनर्चक्रित जल का उपयोग अनिवार्य बनाने पर विचार कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा, ‘उद्योग विभाग एक परियोजना पर भी विचार करेग, जिसके तहत बांधों की ऊंचाई बढ़ाई जाएगी और झील तथा नहरों को और गहरा बनाया जाएगा, ताकि भविष्य के लिए पेय जल सुरक्षित रखा जा सके।’

ग्यारह बड़े सिंचाई बांधों में से सात का जल भंडार खत्म

एक सरकारी आंकड़े के खुलासे के अनुसार, सूखा प्रभावित महाराष्ट्र के ग्यारह बड़े सिंचाई बांधों में से सात का जल भंडार खत्म हो चुका है।

जल संसाधन विभाग की ओर से 15 अप्रैल को जारी आंकडों के मुताबिक, सूखा प्रभावित मराठवाड़ा क्षेत्र में 814 बड़ी, मध्यम और छोटी सिंचाई परियोजनाओं में केवल तीन प्रतिशत जल भंडार उपलब्ध हैं।

मराठवाड़ा के सात बड़े सिंचाई बांधों में जल भंडार पूरी तरह से खत्म हो चुका है। इसमें जायकावाड़ी, पूर्ण सिद्धेश्वर, मजलगांव, मांजरा, निचले तेरना, मन्नार और सिना कोलेगांव शामिल हैं और यह औरंगाबाद, परभनी, बीड़, नांदेड़ और ओस्मनाबाद जिलों में स्थित हैं।

इन आंकड़ों के अनुसार, इन बांधों के अलावा, इस क्षेत्र में स्थित पूर्णा यलदारी बांध में दो प्रतिशत, उपरी पेनगंगा में 10 प्रतिशत, विष्णुपुरी में सात प्रतिशत और निचले दुधना में 18 प्रतिशत जल भंडार मौजूद है।

मराठवाड़ा में 75 छोटे सिंचाई बांधों में केवल चार प्रतिशत जल भंडार मौजूद है, जबकि 728 अति छोटे बांधों में तीन प्रतिशत के करीब जल भंडार मौजूद है। राज्य में सूखे के संकट से निपटने के लिए जल संसाधन विभाग ने पूरे महाराष्ट्र में 4,356 पीने के पानी के टैंकर भेजे हैं।

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