मुस्लिमों के पूर्वज बाबर नहीं, श्रीराम हैं, इसलिए मिलकर बनाएं राम मंदिर: मोहम्मद अफजाल

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मुस्लिमों के पूर्वज बाबर नहीं, श्रीराम हैं, इसलिए मिलकर बनाएं राम मंदिर: मोहम्मद अफजाल

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उत्तर प्रदेश के नवनिर्वाचित अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने पदभार संभालते ही कहा था कि राम मंदिर भाजपा के लिए चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि आस्था का विषय है। राम मंदिर के निर्माण के लिए विश्व हिन्दू परिषद् (विहिप) तथा भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी प्रयासरत हैं। विहिप और स्वामी के साथ ही अब मुस्लिम राष्ट्रीय मंच भी अदालत के बाहर राम मंदिर के मुद्दे को सुलझाने के पक्ष में दिखाई दे रहा है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) ने अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए व्यापक सहमति बनाने की तैयारी कर ली है। मंच इसके लिए बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी से भी बातचीत की तैयारी कर रहा है। गत सप्ताह नागपुर में हुई मंच की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारिणी की बैठक में यह मुद्दा उठा था।
राम-मंदिर

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजाल ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि मुस्लिम समुदाय को अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए हिंदू समाज का समर्थन करना चाहिए। अफजाल ने कहा कि असली असहिष्णुता तो ये है कि बहुसंख्यक हिंदुओं के आराध्य रामलला अयोध्या में तिरपाल में हैं। उन्होंने कहा कि भारत का मुस्लिम समाज कोई बाहर से नहीं आया है और न ही हमारे पूर्वज अरब या बाबर हैं। मोहम्मद अफजाल ने कहा कि भारत के मुसलमानों के पूर्वज भगवान राम ही हो सकते हैं। अफजाल ने यहां तक कहा कि अयोध्या में करीब 20 और मस्जिदें हैं जहां नमाज पढ़ी जाती है वहां कई मजार भी हैं, लेकिन हिंदू समाज मस्जिद या मजार पर तो दावा नहीं करता। वह बस एक ही जगह दावा कर रहे हैं। इसलिए सामूहिक सहमति से राम मंदिर बनने देना चाहिए।

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संयोजक ने कहा कि मजहब-ए-इस्लाम के अंदर अगर मस्जिद बनाना चाहते हैं तो जमीन की मलकियत मुस्लिम समाज में किसी की या वक्फ की होनी चाहिए। लेकिन अयोध्या की उस जगह की मलकियत न तो मुस्लिम समाज के पास है और न वक्फ बोर्ड के पास है। ऐसे में मुस्लिम समाज का अधिकार उस जमीन पर नहीं है, जहां गर्भगृह है। अफजाल ने कहा कि हम नहीं चाहते कि राम के नाम पर इंसानियत का खून बहे, इसलिए इसका फैसला जितनी जल्दी हो उतना अच्छा है।

मोहम्मद अफजाल ने एक समाचार पत्र से बातचीत के दौरान कहा कि हम कोर्ट का फैसला आने से पहले ही इस मसले का समाधान चाहते हैं। इसलिए मंच अब बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी से भी बातचीत की पहल कर रहा है। हम चाहते हैं कि हम हिंदू समाज के साथ मिलकर आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि आज भी अयोध्या में रामलला की पूजा हो ही रही है तो इस मसले को और ज्यादा क्यों खींचना चाहिए? हम फसाद नहीं चाहते और मुस्लिम समाज को तरक्की की दरकार है। इसके लिए विवाद न करते हुए मुस्लिम समाज को अयोध्या में राम मंदिर बनाने में सहयोग करना चाहिए।

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