आयकर समेत 30 टैक्स को खत्म करने पर विचार, PM Modi ने देखा प्रेजेंटेशन

आयकर समेत 30 टैक्स को खत्म करने पर विचार, PM Modi ने देखा प्रेजेंटेशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते अपने सीनियर सचिवों के साथ टैक्स सिस्टम में बदलाव संबंधी एक प्रेजेंटेशन देखा। प्रेजेंटेशन आय कर और अन्य 30 टैक्स को खत्म करने के विषय पर थी। पुणे की आर्थिक रिसर्च कंपनी अर्थक्रांति ने प्रेजेंटेशन का निर्माण किया था जिसमें वर्तमान टैक्स सिस्टम को खत्म करके बैंक की प्रत्येक लेन-देन पर 2 प्रतिशत कर लगाने का सुझाव दिया, साथ ही इंपोर्ट ड्यूटी पहले के समान ही रखने का सुझाव दिया। अर्थक्रांति ने ऐसे समय में यह प्रपोजल सरकार के सामने रखा है जब सरकार पिछले काफी समय से संसद में गुड एंड सर्विस टैक्स बिल को पास कराने का प्रयास कर रही है।

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इस मीटिंग में शामिल एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि टैक्स सिस्टम में अधारभूत-परिवर्तन का सुझाव देने वाले यह प्रपोजल आने वाले बजट के लिए विचाराधीन नहीं है। इस प्रपोजल का लक्ष्य ऐसा टैक्स सिस्टम बनाना है जिससे भ्रष्टाचार के मामलों में कमी लाई जा सके साथ ही टैक्सपेयर के समय और पैसे की भी बजत हो।

इससे पूर्व 2014 के लोकसभा चुनाव के समय जब योग गुरु बाबा राम देव ने आयकर खत्म करने का मुद्दा उठाया था तब भी अर्थक्रांति ने पूर्व बीजेपी अध्यक्ष नीतिन गड़करी को इस संबंध में एक प्रपोजल दिया था। तब नीतिन गड़करी उस कमेटी के अध्यक्ष थे जिस पर पुलिस, प्रशासन, टैक्स सिस्टम, शिक्षा और जूडिशियरी में सुधार संबंधी विजन डॉक्यूमेंट बनाने की जिम्मेदारी थी। प्रपोजल में बताया गया कि अगर सरकार टैक्स इक्ट्ठा करने के लिए सरकारी विभागों की जगह बैंकिग चैनल का प्रयोग करती है तो सरकार के आय में वृद्धि होगी। टैक्स चुराने और बचाने में कमी आयेगी।

अगर बैंक के प्रत्येक लेन-देन पर दो 2 प्रतिशत टैक्स लगता है तो सरकार को 40,00,000 करोड़ रुपये टैक्स के रूप में प्राप्त होंगे। कुछ समय पूर्व अर्थशास्त्री और फिक्की के जनरल-सक्रेटी रहे राजीव कुमार ने भी इस तरह का दावा किया था उनके अनुसार अगर सरकार 2 प्रतिशत टैक्स प्रत्येक लेन-देन में लगाती है तो सरकार को 14,00,000 की सालाना आय होगी। साल 2014-15 में वर्तमान टैक्स सिस्टम के हिसाब से सरकार की कुल टैक्स आय 9,084,63 करोड़ थी।

हालांकि सरकार को इस तरह का प्रपोजल पहली बार नहीं दिया गया है इससे पहले भी पूर्व की कई सरकारें ऐसे प्रस्ताव नकार चुकी हैं। सूत्रों के अनुसार सचिवों के समूह ने अर्थक्रांति द्वारा पेश किये गये प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय को भेजने का सुझाव दिया है साथ ही उन्होंने कहा कि हमें नहीं लगता प्रधानमंत्री जी इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ना चाहिए जब तक कोई विकसित देश इस तरह के किसी प्रस्ताव को नहीं स्वीकारता।

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