राजनीतिक रोटी सेंकने के चक्कर में केजरीवाल की हो गयी बेइज्जती

राजनीतिक रोटी सेंकने के चक्कर में केजरीवाल की हो गयी बेइज्जती

नई दिल्ली: रोहित वेमुला सुसाइड केस के बाद केजरीवाल हैदराबाद पहुँचने वाले राहुल गाँधी के बाद दूसरे नेता थे। दलित छात्र देखते ही दोनों नेताओं ने सोचा कि अगर इनके प्रति थोड़ी सी सहानुभूति दिखा दी जाय तो पूरे देश के दलित उन्हें मसीहा मानने लगेंगे और उन्हें वोट देकर प्रधानमंत्री बना देंगे। यही सोचकर केजरीवाल ने राजनीतिक चाल चल दी और रोहित वेमुला के भाई को दिल्ली सरकार में नौकरी देने का वादा कर दिया। केजरीवाल ने रोहित के भाई राजा चैतन्य को नौकरी भी दी लेकिन क्लर्क की नौकरी।

रोहित वेमुला के MSC और NET पास भाई ने जब देखा कि केजरीवाल ने उसे चौथे ग्रेड की क्लर्क की नौकरी ऑफर की है तो उसने तुरंत ही नौकरी से इनकार कर दिया और बात मीडिया में आ गयी। इसके बाद तो केजरीवाल की हर तरफ फजीहत होने लगी, सभी लोगों ने कहा कि राजनीतिक रोटी सेंकने के चक्कर में केजरीवाल इतने अंधे हो गए कि क्लर्क की नौकरी ऑफर करते हुए उन्होंने यह भी नही सोचा कि MSC और NET पास राजा चैतन्य के दिल को कितनी ठेस पहुंचेगी।

बात कोर्ट में भी पहुँच गयी और एक अधिवक्ता अवध कुमार कौशिक ने केजरीवाल के खिलाफ याचिका दायर करते हुए पूछा कि आखिर केजरीवाल ने किस मकसद ने रोहित वेमुला के भाई राजा चैतन्य को नौकरी ऑफर की थी, क्या रोहित वेमुला दिल्ली का निवासी था, क्या रोहित वेमुला दिल्ली में नौकरी करता था, जब रोहित वेमुला का दिल्ली राज्य से कोई सम्बन्ध नहीं था तो केजरीवाल ने रोहित वेमुला के भाई पर किस आधार पर सहानुभूति दिखाई, क्या उनका फैसला राजनीति फायदे के लिए किया गया था।

उन्होंने कोर्ट से कहा कि जनवरी में आत्महत्या करने वाले हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित शोधछात्र रोहित वेमुला के भाई को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की पेशकश का दिल्ली सरकार का फैसला ‘राजनीति से प्रेरित’ था। दिल्ली सरकार ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी.रोहिणी तथा न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ से कहा कि रोहित वेमुला के भाई राजा चैतन्य कुमार वेमुला ने सरकार की पेशकश को न मानने की सूचना दी है।

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राजनीतिक रोटी सेंकने के चक्कर में केजरीवाल की हो गयी बेइज्जती

दिल्ली सरकार की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा, “राजा चैतन्य को चार अप्रैल को लिखे गए एक पत्र के माध्यम से दिल्ली प्रशासनिक सेवा में अवर श्रेणी लिपिक (ग्रेड-4) की नौकरी की पेशकश की गई थी, जिसे स्वीकार करने से उन्होंने इनकार कर दिया, इसलिए हम अपना फैसला वापस लेने जा रहे हैं।”

न्यायालय ने सरकार को याचिका पर हलफनामा दाखिल करने को कहा और मामले की सुनवाई की अगली तारीख 13 जुलाई मुकर्रर की।

अधिवक्ता अवध कुमार कौशिक ने अपनी याचिका में सरकार के फैसले को कानून, नीति व दिशानिर्देशों के बिना पूर्णत: राजनीति से प्रेरित, अवैध, मनमाने ढंग से, भेदभाव पूर्ण व अन्यायोचित बताते हुए खारिज करने की मांग की।

याचिका में हैदराबाद यूनिवर्सिटी के शोधछात्र रोहित वेमुला के भाई राजा को एक क्लर्क की नौकरी देने को लेकर केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप की सरकार के विवेक पर सवाल उठाया गया है।

याचिका में कहा गया, “छात्र ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी में आत्महत्या की, जिसका दिल्ली से कोई लेना-देना नहीं था और निश्चित तौर पर वह दिल्ली में सरकारी नौकरी नहीं कर रहा था। इसलिए सरकार द्वारा की गई पेशकश पूरी तरह राजनीति से प्रेरित, पूर्वाग्रहपूर्ण तथा अवैध है।”

याचिका के मुताबिक, यह मामला न तो किसी विशेष श्रेणी का है और न ही किसी प्रकार की शहादत व किसी अच्छे कारण के लिए जीवन के बलिदान का है। यह हैदराबाद में सिर्फ एक आत्महत्या का मामला है, इसलिए आप का यह फैसला न तो कोई समझदारी भरा निर्णय है और न ही सार्वजनिक कल्याण के हित में है।

याचिका में नियुक्ति की प्रक्रिया को यह कहते हुए चुनौती दी गई है कि अगर दिल्ली सरकार को प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी जाती है, तो इसका गलत संदेश जाएगा।

जनहित याचिका में कहा गया है कि सरकार का फैसला पूरी तरह कानून व लोक नीति का उल्लंघन है, जिससे उन लोगों खासकर दिल्ली के युवाओं के मौलिक अधिकारों का हनन होता है, जो अपनी मेधा के आधार पर नौकरी पाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन दिल्ली सरकार की इस तरह के फैसले से वंचित रह जाते हैं।

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