अमेरिका ने कहा, भारत एनएसजी में शामिल होने को तैयार

वॉशिंगटन: एक तरफ चीन ने दावा किया है कि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत का प्रवेश रोकने के लिए उसके पास 48 देशों के इस संगठन में कई सदस्यों का साथ है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने इस विशेष परमाणु समूह में भारत के दाख़िले का समर्थन किया है।

एनएसजी

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा  कि ‘2015 में भारत दौरे के दौरान राष्ट्रपति ने फिर से कहा था कि अमेरिका का ऐसा मानना है कि भारत मिसाइल तकनीक कंट्रोल से जुड़ी सभी जरूरतें पूरी करता है और वह एनएसजी सदस्यता के लिए एकदम तैयार है।’ किर्बी ने यह प्रतिक्रिया तब दी जब चीन और पाकिस्तान द्वारा भारत की एनएसजी सदस्यता के विरोध से जुड़ी ख़बरें आ रही हैं।

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गौरतलब है कि 25-26 अप्रैल को ही भारत ने एनएसजी सदस्‍यता के लिए अधिकारिक तौर पर प्रेजेंटेशन दिया था। एनएसजी सदस्‍यों के सामने इसी तरह का प्रेजेंटेशन पाकिस्तान ने भी दिया है। चीन का मानना है कि भारत और पाकिस्‍तान के बारे में ‘समानता के आधार’ पर फैसला किया जाए। यही नहीं, पाकिस्तान सभी एनएसजी सदस्‍यों को पत्र भी लिखने जा रहा है। इस्‍लामाबाद की कोशिश होगी कि वह भारत की एप्‍लीकेशन पर जून में होने वाली चर्चा से पहले ही पत्र भेज दे।

क्‍या है एनएसजी

1974 में न्‍यूक्लियर सप्‍लायर्स ग्रुप की स्‍थापना की गई थी। मौजूदा समय में 49 देश इसके सदस्‍य हैं। परमाणु हथियार बनाने में इस्‍तेमाल की जाने वाली सामग्री की आपूर्ति से लेकर नियंत्रण तक इसी के दायरे में आता है। भारत में इस समय परमाणु संयंत्र लगाए जाने की कवायद चल रही है। भारत सरकार स्‍पष्‍ट कर चुका है, उसका मकसद बिजली तैयार करना है ऐसे में एनएसजी की सदस्‍यता मिलने से उसकी राह बेहद आसान हो जाएगी। लेकिन एनएसजी की सदस्‍यता के लिए भारत को कई शर्तों को भी मंजूर करना होगा। जैसे कि परमाणु परीक्षण न करना आदि।

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