दिल्ली यूनिवर्सिटी की किताबों में भगत सिंह को बताया जा रहा है ‘आतंकवादी’

दिल्ली यूनिवर्सिटी की किताबों में भगत सिंह को बताया जा रहा है ‘आतंकवादी’

दिल्ली यूनिवर्सिटी की किताबों में भगत सिंह को बताया जा रहा है ‘आतंकवादी’

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नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जा रही ‘भारत का स्वतंत्रता संघर्ष’ किताब में भगत सिंह और उनके साथियों को क्रांतिकारी आतंकवादी बताए जाने पर हंगामा खड़ा हो गया है। भगत सिंह के साथ आतंकवादी शब्द जोड़ने पर उनके परिवार समेत तमाम राजनीतिक दलों ने इसकी आलोचना की है। इस मुद्दे पर लोकसभा में आज सत्तापक्ष और विपक्ष में नोंकझोंक भी हुई। शहीद-ए-आजम के परिवार ने केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी को चिट्ठी लिखकर किताब से आतंकवाद शब्द हटाने की मांग भी की है।

‘भारत का स्वतंत्रता संघर्ष’ यही वो किताब है, जिसके चैप्टर नंबर 20 को लेकर बवाल खड़ा हो गया है। इस चैप्टर का शीर्षक भगत सिंह, सूर्य सेन और क्रांतिकारी आतंकवादी है। 13 पन्नों के इस चैप्टर में 10 से ज्यादा बार आतंकवाद और आतंकवादी शब्द लिखा गया है।

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आप सोच रहे होंगे कि दिल्ली यूनिवर्सिटी ये क्या पढ़ा रही है? देश की आजादी के लिए शहीद होने वाले सच्चे सपूत भगत सिंह आतंकी थे? खबर सामने आने के बाद उनके परिवार ने इसे शहीदों का अपमान बताया। उधर शहीद-ए-आजम के पोते ने डीयू के वीसी से मुलाकात कर इसकी शिकायत की और किताब से आतंकवादी शब्द हटाने की मांग की है।

खबर के सुर्खियों में आते ही सियासत भी गरमा गई। कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों ने जहां इसे शर्मनाक बताया तो सत्ताधारी बीजेपी ने कांग्रेस और वामपंथी दलों को ही इसके लिए जिम्मेदार ठहरा दिया। कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा है कि इससे ज्यादा शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता जो शहीद-ए-आजम भगत सिंह के साथ किया जा रहा। वहीं बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर का इस मामले पर कहना है कि कांग्रेस और कम्यूनिस्ट के गठबंधन ने हमेशा इतिहास बदलने की कोशिश की है।

भगत सिंह के नाम के साथ आतंकवाद शब्द जोड़ने से डीयू के छात्र भी नाराज हैं। उन्होंने इसे देश के हीरो के साथ अन्याय करार दिया और ऐसा कोई भी शब्द किताब से हटाने की मांग की। वहीं इतिहासकारों का कहना है कि आज के दौर में आतंकवाद शब्द के मायने बदल गए हैं।

‘भारत का स्वतंत्रता संघर्ष’ किताब जाने-माने इतिहासकार बिपिन चंद्र, मृदुला मुखर्जी, आदित्य मुखर्जी, के एन पनिकर और सुचेता महाजन ने मिलकर लिखी है। हालांकि भगत सिंह से जुड़ा अध्याय बिपिन चंद्र ने लिखा है। इस किताब का पहला संस्करण इंग्लिश में 1989 में प्रकाशित हुआ था। बाद में दिल्ली यूनिवर्सिटी ने इसका पहला हिंदी संस्करण प्रकाशित किया, लेकिन सवाल ये कि करीब तीन दशकों तक भगत सिंह को आतंकवादी बताया जाने वाला चैप्टर पढ़ाने का सिलसिला जारी था तो बवाल आज क्यों हो रहा है। पहले सवाल क्यों नहीं उठाए गए? गैरतलब है की ये गलत इतिहास वर्षों से लिखा और पढाया जा रहा हो भले ही आज विपक्ष इससे इनकार करे पर इस प्रकार के कार्यों को उसने अपने समय काल में फलने फूलने की आजादी  दी  उसका ही परिणाम है की आज देशवासियों के सामने ये सब sach आ रहा है और सभी देशभक्त देशवासी चाहते हैं की ये अपमानजनक चीजें इन किताबों के हटनी चाहिए.

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