जानिए क्या है चाबहार समझौता, जिसे करने मोदी गए है ईरान

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चाबहार समझौता तेहरान : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईरान से व्यापार, निवेश और ऊर्जा संबंधों को मजबूत बनाने के लिए 2 दिन की यात्रा पर रविवार को तेहरान पहुंचे। उनकी इस यात्रा के दौरान रणनीतिक तौर पर अहम चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते पर साइन किए जाने की संभावना है, जो 13 साल से लटका हुआ है। अब जब पश्चिमी देशों ने ईरान से प्रतिबंध हटा लिए हैं, तब इस करार के होने से भारत की बड़ी ऊर्जा जरूरतें पूरी होने की उम्मीद की जा रही है।

चाबहार समझौता के तहत बनने वाले है बंदरगाह और रेलवे लाइन
चाबहार समझौता के तहत बनने वाले है बंदरगाह और रेलवे लाइन

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चाबहार दक्षिण-पूर्व ईरान का बंदरगाह है। इसके जरिए भारत को पाकिस्तान से होकर गए बिना ही अफगानिस्तान तक पहुंचने का रास्ता मिल सकेगा। अफगानिस्तान के साथ भारत के नजदीकी सुरक्षा और आर्थिक संबंध हैं। भारत के लिए काफी रणनीतिक महत्व रखने वाला यह बंदरगाह ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है। यह फारस की खाड़ी के बाहर स्थित है और भारतीय पश्चिमी तट से इस पर आसानी से पहुंच बनाई जा सकती है।

भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के बंदरगाह के लिए यह पहला विदेशी उपक्रम होगा। भारत और ईरान में 2003 में ओमान की खाड़ी में होमरुज जलडमरूमध्य के बाहर पाकिस्तान की सीमा के पास चाहबहार बंदरगाह का विकास करने की सहमति बनी थी। ईरान पर पश्चिमी प्रतिबंधों की वजह से यह परियोजना काफी धीमी रफ्तार से आगे बढ़ी। इस साल जनवरी में ईरान से प्रतिबंध हटाए गए और उसके बाद से भारत इस करार को पूरा करने के लिए काम कर रहा है।

दुनिया भर में वैश्विक तेल खपत का 20 फीसदी हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर ही गुजरता है। चाबहार बंदरगाह के पहले चरण के विकास के लिए समझौते पर साइन होने की सूरत में भारत-ईरान से तेल आयात दोगुना करने की भी सोच रहा है। कुछ साल पहले ईरान उसका दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता था। इसके साथ ही वह ईरान में एक विशाल गैस क्षेत्र के विकास के लिए अधिकार हासिल करना चाहता है।

पीएम मोदी ने उम्मीद जताई है कि उनकी इस यात्रा के दौरान चाबहार पर करार पूरा हो जाएगा।

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